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कोआपरेटिव बैंक चांपा के कर्मचारियों पर जल्द होगी कार्रवाई, मृत व्यक्ति के नाम केसीसी लोन आहरण का मामला, जांच के बाद कार्रवाई की फाइल फांक रही धूल

@चौथा स्तंभ न्यूज़ लगातार…

जांजगीर-चांपा। मृत व्यक्ति के नाम केसीसी लोन निकालकर रकम आहरण करने के मामले में सिवनी चांपा के प्रभारी समिति प्रबंधक ललित देवांगन को बर्खास्त करने की कार्रवाई की गई थी। इस मामले में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक बिलासपुर मर्यादित के सीईओ एसपी सिंह के निर्देश पर दो सदस्यीय टीम ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक चांपा पहुंचकर यहां के शाखा प्रबंधक और बैंक कर्मचारियों से बयान दर्ज कर जांच प्रतिवेदन सीईओ को प्रस्तुत किया था। लेकिन जांच प्रतिवेदन मिलने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। आखिरकार बिलासपुर जाकर सीईओ से इस संबंध में बात करने पर उन्होंने इसी हफ्ते मामले में कार्रवाई करने का दावा किया है।

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आपकों बता दें कि चांपा से लगे सिवनी निवासी मृत व्यक्ति सागर सिंह पिता धवन सिंह के नाम वर्ष 2022-23 में 1 लाख 35 हजार केसीसी लोन समिति प्रबंधक ललित देवांगन ने तैयार किया था। मामला प्रकाश में आने के बाद शिकायत की जांच कराई गई, जिसमें ललित देवांगन सहित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक चांपा के कर्मचारियों को दोषी ठहराया गया। सहकारी संस्थाएं जांजगीर के उप पंजीयक ने ललित देवांगन के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सेवा सहकारी समिति के प्राधिकृत अधिकारी व बलौदा के सहकारिता विस्तार अधिकारी को पत्र लिखा था। इस पर संज्ञान लेते हुए बलौदा के सहकारिता विस्तार अधिकारी जेके टंडन ने सेवा सहकारी समिति मर्या. सिवनी के प्रभारी समिति प्रभारी ललित देवांगन को नोटिस जारी कर सप्ताह भर के भीतर जवाब प्रस्तुत करने को कहा था, लेकिन जवाब तो दूर ललित देवांगन सेवा सहकारी समिति सिवनी आना ही बंद कर दिया। इसे गंभीरता से लेते हुए प्रबंध मंडल कार्यकारिणी समिति की बैठक हुई, जिसमें सेवा नियम 2018 के कंडिका 16-4 एवं 16-5 के तहत ललित देवांगन को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। वहीं उसकी जगह महावीर बरेठ को प्रभारी समिति प्रबंधक की जवाबदारी सौंपी गई है। इधर, इस पूरे मामले में जिला सहकारी बैंक चांपा के शाखा प्रबंधक सहित अन्य कर्मचारियों के खिलाफ अब तक किसी तरह की कार्रवाई नहीं हो सकी है।

बैंक कर्मियों पर इस हफ्ते गिरेगी गाजः सीईओ सिंह
मृत व्यक्ति के नाम केसीसी लोन जारी कर रकम आहरण करने के मामले में सहकारी संस्थाएं जांजगीर के उप पंजीयक द्वारा कराई गई जांच में बैंक के दो कैशियर सहित कर्मचारियों को दोषी ठहराया गया था। वहीं बैंक के शाखा प्रबंधक की भूमिका को भी संदिग्ध बताते हुए उसके खिलाफ जांच की अनुशंसा जिला सहकारी केंद्रीय बैंक बिलासपुर के सीईओ से की गई थी। इधर, बिलासपुर के सीईओ ने मामले में जांच करने के लिए दो सदस्यीय सीनियर शाखा प्रबंधकों की टीम बनाई थी। टीम के अधिकारियों ने चांपा स्थित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक पहुंचकर शाखा प्रबंधक सहित कर्मचारियों का बयान दस्तावेजों के साथ दर्ज किया। जांच रिपोर्ट बिलासपुर के सीईओ को सौंपी गई थी, लेकिन इसके ढाई महीने बाद भी शाखा प्रबंधक व बैंक कर्मचारियों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं हो सकी है। इससे बिलासपुर सीईओ की भूमिका पर भी सवाल उठने लगा है। इस बीच हमनें भी बिलासपुर सीईओ एसपी सिंह को मोबाइल के जरिए कई बार संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने मोबाइल रिसीव करना मुनासिब नहीं समझा। आज जिला सहकारी बैंक मर्यादित बिलासपुर जाकर वहां के सीईओ एसपी सिंह से इस संबंध में बात की, तो उनका कहना था कि यहां प्रकरणों का भंडार है, जिसके चलते इस प्रकरण में थोड़ा विलंब हुआ है। इस हफ्ते तक इस प्रकरण में आदेश जारी कर दिया जाएगा।

धोखाधड़ी का मामला, एफआईआर का प्रावधान
कानून के जानकारों का कहना है कि अपराधिक षड़यंत्र करते हुए मृत व्यक्ति के नाम केसीसी लोन सहित धान बिक्री और बोनस की राशि आहरण करना अपराध की श्रेणी में आता है, जिसके लिए आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत पुलिस थाने में अपराध दर्ज करने का प्रावधान है। हालांकि प्रभारी समिति प्रबंधक ललित देवांगन को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है, लेकिन इस संज्ञेय अपराध के लिए एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। इधर, सिवनी के शिकायतकर्ता आशीष राठौर का कहना है कि जिला सहकारी बैंक मर्यादित बिलासपुर के सीइओ ने जांच प्रतिवेदन व मामले से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया है, जिसके चलते अब तक एफआईआर की कार्रवाई शुरू नहीं हो सकी है। उन्होंने मामले से जुड़े दस्तावेजों के लिए आरटीआई लगाया है। दस्तावेज उपलब्ध होते ही एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। उनका यह भी कहना है कि जरूरत पड़ने पर यह मामला न्यायालय में भी जाएगा।

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