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फिर इस बार 38 में मात्र 3 बच्चे ही हो सके पास, कई सालों से लगातार खराब आ रहा बच्चों का रिजल्ट, IIHT की हालत बद से हुई बदतर

जांजगीर-चांपा। देश के सातवें और प्रदेश के पहले भारतीय हाथकरघा प्रद्योगिकी संस्थान की हालत प्रभारी प्राचार्य की उदासीनता से काफी बद्तर हो चुका है। यहां शिक्षा का स्तर पिछले कुछ सालों से लगातार गिरता जा रहा है। इसके चलते इस बार भी 38 बच्चों में से महज 3 बच्चे ही पास हो पाए हैं, जबकि शेष बच्चे फेल हो गए हैं। यही स्थिति बीते कुछ सालों से बनी हुई है। खास बात यह है कि यहां का प्राचार्य प्रभारी है, जो महीने में कभी कभार ही कॉलेज आ पाते हैं। उनकी अनुपस्थिति में यहां रामराज स्थापित हो गया है। यहां शिक्षा के स्तर ने पूरी तरह दम तोड़ दिया है। यही हाल रहा तो वो दिन दूर नहीं, जब इस कॉलेज में ताला लग जाए।

कोसा, कांसा व कंचन की नगरी चांपा के पुराने कॉलेज में छत्तीसगढ़ के पहले भारतीय हाथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान का शुभारंभ वर्ष 2007 में हुआ था। बाद में कॉलेज का अपना खुद का भवन और छात्रावास लछनपुर में बनकर संचालित है। शुरू में यहां सबकुछ ठीक रहा, लेकिन जिम्मेदार नेताओं और अफसरों का जैसे ही यहां से ध्यान हटा, यहां मनमानी शुरू हो गई। तब से अब तक यहां प्राचार्य की पूर्णकालिक नियुक्ति नहीं हो सकी है। प्रभारी प्राचार्य के भरोसे जैसे तैसे काम चलाया जा रहा है, जो महीने में एक या दो बार ही कॉलेज आ पाते हैं। उनकी स्थिति में यहां लापरवाही चरम पर है। यही वजह है कि हर साल जहां 95 फीसदी बच्चे फेल हो रहे हैं तो वहीं दर्ज संख्या में अब गिनती की ही रह गई है। इस बार तो दर्ज संख्या ने एक रिकार्ड ही कायम कर दिया। इन डेढ़ दशक में इस बार सिर्फ 6 बच्चों ने ही दाखिला लिया है। पिछले कुछ सालों की तरह इस बार भी यहां का रिजल्ट बेहद चिंताजनक है। 38 बच्चों में सिर्फ 3 बच्चे ही पास हो सके हैं। जिसमें प्रथम वर्ष में 6 में 6 बच्चें फेल हो गए, जबकि द्वितीय वर्ष में 16 में 15 बच्चें फेल हुए तो वहीं अंतिम वर्ष में 16 में 14 बच्चे फेल हुए हैं। इसी तरह की स्थिति हर बार रही है। जब भी प्रभारी प्राचार्य से हमनें इस संबंध में बात की, तो हर बार उन्होंने इसके लिए बच्चों को ही जिम्मेदार ठहराया। स्थिति में सुधार लाने कभी कोई पहल ही नहीं हो सकी है। यही वजह है कि तीनों वर्ष मिलाकर यहां 90 सीट निर्धारित है, जिसमें से आधी सीट हर साल खाली रह जाती है। इस बार महज 38 बच्चों ने ही प्रवेश लिया है।

बच्चों के भविष्य से खिलवाड़
कॉलेज में लापरवाही किस कदर हावी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विषय विशेषज्ञ को पढ़ाने की जिम्मेदारी देने के बजाय वैकल्पिक विषय लेकर पढ़ने वाले एक शिक्षक को ही दायित्व दे दिया गया। बताया जाता है इस वर्ष अंतिम वर्ष के छात्रों का वैकल्पिक विषय चुनने के लिए भेजा गया पत्र भी हमारे पास मौजूद है, जिसमे बच्चों ने मेनेजमेंट एंड फॉरेन ट्रेड विषय चुनने के लिए पत्र लिखा था। जिसका विगत 10 वर्षो से परीक्षा परिणाम भी बेहतर रहा था लेकिन उसे दरकिनार करते हुए दूसरे विषय का चयन किया गया। मेनेजमेंट विषय को पढ़ाने के लिए विषय विशेषज्ञ का आवेदन प्राप्त होने पर भी उसे दरकिनार करते हुए एम टेक किए हुए टीचर से कार्य लिया जा रहा है, जिससे समझा जा सकता है बच्चो के भविष्य से किस तरह खिलवाड़ किया जा रहा है।

आए दिन सुर्खियों में रहता है कॉलेज
प्रदेश के पहले आईआईएचटी आए दिन अपने नए-नए कारनामों को लेकर सुर्खियों में रहता है। चाहे बात रेप के आरोपी से कार्य लेने की हो या फिर उसके सेवावृद्धि के लिए लिखे पत्र में रेप के आरोपी के जेल में रहने और 2 लाख 64 हजार रुपए को 3 वर्षो तक संबंधित संस्थान में जमा करने के बजाय अपने पास दबाए रखने का हो। यहां तक बच्चो से शैक्षणिक भ्रमण के नाम पर 1-1 हजार रुपए लेने की भी शिकायत सामने आई थी। बताया जाता है कॉलेज में चार-पांच सालों से ऑडिट नहीं हुआ है। कुछ लोगां का दावा है कि यदि कॉलेज का ऑडिट हो तो यहां बड़े पैमाने पर घालमेल सामने आ सकता है। लोगों का यह भी कहना है कि हर साल यहां अच्छा खासा बजट आता है, जिसमें से मेंटेनेंस की आड़ में काफी वारा न्यारा किया जाता है।

इस तरह सुधर सकती है व्यवस्था
देश के सातवें और प्रदेश के पहले भारतीय हाथकरघा प्रद्योगिकी संस्थान को यदि वाकई बचाना है तो इसके लिए जिम्मेदार अफसर और नेताओं को पहल करनी होगी। जिस तरह यहां प्रभारी प्राचार्य है और उनके यहां ज्यादातर दिन नहीं रहने के कारण जिस तरह यहां के स्टाफ के आने-जाने का कोई समय ही नहीं है, सबसे पहले इस पर शिकंजा कसा जा सकता है। यहां लगे सीसीटीवी कैमरे से स्टाफ के कॉलेज आने और जाने का समय देखा जा सकता है। इसके अलावा खासकर यदि कलेक्टर और विधायक यहां समय-समय पर निरीक्षण कर स्टाफ को दिशा-निर्देश दे ंतो भी काफी हद तक व्यवस्था में सुधार आ सकता है।

किया जाएगा जरूरी प्रयास
आईआईएचटी की हालत खराब होने की जानकारी मिली है। कॉलेज का निरीक्षण कर वहां की समस्याओं को समझा जाएगा। फिर उस लिहाज से कॉलेज और वहां शिक्षा के स्तर में सुधार लाने जरूरी प्रयास किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर सरकार से पत्राचार भी किया जाएगा।
-व्यास कश्यप, विधायक जांजगीर चांपा

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