कुष्ठ रोगियों की सेवा में समर्पित चांपा का बेथेस्डा लेप्रोसी मिशन: 125 वर्षों से उम्मीद की किरण बना हुआ अस्पताल

चांपा (जांजगीर-चाम्पा)। समाज में आज भी कुष्ठ रोग को लेकर अनेक भ्रांतियां और सामाजिक भेदभाव मौजूद हैं, जिसके कारण इस बीमारी से पीड़ित मरीजों को सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है। लेकिन ऐसे पीड़ितों के लिए छत्तीसगढ़ के चांपा में स्थित बेथेस्डा लेप्रोसी मिशन (बी. एल. होम) पिछले 125 वर्षों से सेवा और सहारा बनकर कार्य कर रहा है।
बेथेस्डा अस्पताल में कुष्ठ रोग से ग्रसित मरीजों के लिए मेल और फीमेल वार्ड, आईसीयू, तथा सर्वसुविधायुक्त चिकित्सा सेवा निःशुल्क प्रदान की जा रही है। अत्याधुनिक लैबोरेटरी, जांच सुविधाएं और मेडिकल ट्रीटमेंट की व्यवस्था यहां उपलब्ध है। देशभर से आए मरीजों को न केवल इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है।
कुष्ठ रोग के कारण कई बार मरीजों के शरीर में विकृति आ जाती है, और अगर समय पर इलाज न हो तो अल्सर, न्यूराइटिस व रिएक्शन जैसी जटिलताएं उत्पन्न हो जाती हैं। ऐसे में बी.एल. होम अस्पताल में मरीजों को निःशुल्क काउंसलिंग और इलाज दिया जाता है। खास बात यह है कि कुष्ठ रोगियों को दी जाने वाली एम.डी.टी. (Multi Drug Therapy) दवाओं के सेवन से पहले, दौरान या बाद में होने वाली प्रतिक्रियाओं का भी यहां संपूर्ण और निशुल्क इलाज किया जाता है।

इस मानवीय सेवा कार्य में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड भी अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। कंपनी के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के अंतर्गत पिछले 9 महीनों से “सहारा प्रोजेक्ट” चलाया जा रहा है। इस परियोजना के तहत मरीजों के लिए अत्याधुनिक लैब, संसाधनों की सुविधा और जटिल सर्जरी की सुविधा भी निशुल्क प्रदान की जा रही है। अब तक सैकड़ों मरीज इस अस्पताल की सेवाओं के माध्यम से पूरी तरह स्वस्थ होकर समाज में सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।

बेथेस्डा लेप्रोसी होम एंड हॉस्पिटल परिसर में संचालित छत्तीसगढ़ वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर भी कुष्ठ पीड़ितों, विकलांग बच्चों और कुष्ठ पीड़ितों के स्वस्थ बच्चों को विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है।
बी.एल. होम अस्पताल ने इस सेवा कार्य में सहयोग देने के लिए इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रति आभार व्यक्त किया है और उम्मीद जताई है कि इस प्रकार की सीएसआर पहलें आगे भी समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन में नई रोशनी लाती रहेंगी।
