
जांजगीर चांपा। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के संभावित जांजगीर-चांपा जिला मुख्यालय आगमन से पहले जिले का सियासी तापमान चढ़ गया है। 7 अगस्त को मुख्यमंत्री के संभावित दौरे से ठीक पहले कांग्रेस ने राज्य सरकार की “हाफ बिजली बिल योजना” को बंद किए जाने के विरोध में जोरदार आंदोलन की घोषणा की है। कांग्रेस के इस ऐलान के बाद प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 6 और 7 अगस्त को जिलेभर में विरोध प्रदर्शन और आंदोलनों का ऐलान किया है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन केंद्र और राज्य सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ है, विशेषकर “हाफ बिजली बिल योजना” को समाप्त किए जाने के निर्णय को लेकर। कांग्रेस का कहना है कि यह योजना आम जनता को महंगाई से राहत देने वाली थी, और इसके बंद होने से जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में राज्यभर में सभी जिला मुख्यालयों पर 6 अगस्त को प्रेसवार्ता और 7 अगस्त को बिजली विभाग के कार्यालयों के समक्ष धरना-प्रदर्शन और पुतला दहन जैसे विरोध कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है। इसी क्रम में जांजगीर जिला मुख्यालय में भी कांग्रेस द्वारा व्यापक प्रदर्शन की तैयारी की गई है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के 7 अगस्त को जांजगीर पहुंचने की संभावना को देखते हुए यह विरोध प्रदर्शन प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री जिले में विभिन्न विकास कार्यों का निरीक्षण और समीक्षा बैठक के लिए दौरा कर सकते हैं। लेकिन कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन की वजह से सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन की तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही हैं।
जिले में संभावित ट्रैफिक डायवर्जन, पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती और राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग रूट प्लान तैयार किए जा रहे हैं। वहीं कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भी दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं कि वे शांतिपूर्ण और अनुशासित ढंग से विरोध करें ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
प्रदेश कांग्रेस ने सभी वरिष्ठ नेताओं, जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं से आह्वान किया है कि वे बड़ी संख्या में शामिल होकर सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाएं। कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि जब तक “हाफ बिजली बिल योजना” को बहाल नहीं किया जाता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब सबकी निगाहें 7 अगस्त पर टिकी हैं, जब एक ओर मुख्यमंत्री का आगमन संभावित है, तो दूसरी ओर कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन भी चरम पर होगा। देखना होगा कि प्रशासन कैसे संतुलन बनाए रखता है और स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से नियंत्रित करता है।