चांपा में श्रीमद् भगवत गीता सार का दूसरा दिन, अंतर्मन के विषाद व निराशा से मुक्त करने भगवान ने अर्जुन को दिया गीता ज्ञान: शशिप्रभा

0 विषम परिस्थितियों में सामर्थ्य प्रदान करता है श्री मद भगवत गीता ज्ञान
चांपा। हम सभी उस अर्जुन की तरह है जो युद्ध के मैदान पर धर्म और अधर्म के बीच खड़ा है और अधर्म की ओर खड़े अपने संबंधिओं को देखकर युद्ध करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।
अर्जुन प्रत्येक जीवात्मा का प्रतीक है जो जीवन में आने वाली परिस्थितियों विषमताओं से घबरा जाता है परंतु पुन: भारत में आदि सनातन देवी देवता धर्म अर्थात् सत्य धर्म की स्थापना करनी है तो हमें अधर्म अर्थात् काम , क्रोध , लोभ , मोह, अहंकार , बुराइयों पर जीत प्राप्त करना अत्यन्त आवश्यक है।

अर्जुन के विषाद निराशा हताशा को दूर करने के लिए भगवान ने गीता ज्ञान देकर उनके आत्मशक्ति को जगाया उक्त बातें चांपा में चल रहे श्रीमद भगवत गीता सार सुखद जीवन का आधार के आध्यात्मिक रहस्यों द्वारा खुशहाल जीवन नामक गीता प्रवचन कार्यक्रम के दूसरे दिन लोगों को सम्बोधित करते हुए गीता सार प्रवक्ता ब्रह्माकुमारी शशिप्रभा दीदी ने कहीं उन्होंने आगे कहा कि आत्मा सतोगुणी है जिसमें सुख शांति प्रेम आनंद ज्ञान शक्ति पवित्रता समाहित है।

जिसके द्वारा ना दिखाई देने वाली आत्मा इतने बड़े पांच तत्वों के शरीर को चलाती है। आत्मा अजर अमर अविनाशी है जो नित्य सनातन और पुरातन है जब परमात्मा की याद में हम स्थित होते हैं तो आत्मा पुनः इन सातोंगुणों से भरपूर हो जाती है। जिस प्रकार वस्त्र के पुराने हो जाने पर हम नये वस्त्र को धारण करते हैं उसी प्रकार शरीर रूपी वस्त्र जब पुराना जर्जर हो जाता है या शरीर में किसी भी प्रकार की कोई खराबी आ जाती है तो आत्मा भी पुराने शरीर को छोड़ पुन: नया शरीर धारण करती है गीता में निहित अमूल्य नीधियों को जब हम जीवन में आत्मसात करते हैं तब हमारे जीवन में अद्भुत सकारात्मक परिवर्तन आता है और मानव जीवन में समय प्रति समय आने वाले अनेक विषम परिस्थितियों समस्याओं उलझनों को पार करने का सामर्थ्य आ जाता हैl कार्यक्रम आयोजन के निमित्त बने श्री लक्ष्मीचंद देवांगन एवं श्रीमती उमा देवांगन ने गीता सार के आध्यात्मिक रहस्यों से समस्त नगर वासियों को लाभान्वित होने हेतु आहवान कियाl अंत में सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया l
