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डॉ. रमाकांत सोनी की कृति “अपना आकाश” (आत्मकथा) अंतर्मन की यात्रा का शब्द चित्र है, पुस्तक समीक्षा : अनंत थवाईत

देश के विभिन्न तीर्थ स्थलों के साथ ही 12 ज्योर्तिलिंग के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त करने वाले चांपा निवासी अंचल के वरिष्ठ साहित्यकार डा.रमाकांत सोनी जी की 12 वीं कृति “अपना आकाश” (आत्मकथा) अंतर्मन की यात्रा का शब्द चित्र है .इस पुस्तक मे उन्होने वंशावली (पारिवारिक पृष्ठभूमि) से लेकर जीवन के विभिन्न पहलुओं को शब्दों मे पिरोते हुए अपना साहित्यिक परिचय ( कृतित्व ) बड़ी खुबसूरती के साथ दिया है. डा. रमाकांत सोनी जी ने “अपना आकाश” मे भले ही अपने निजी जीवन से जुड़ी यादों को रेखांकित किया है लेकिन पढ़ने से ऐसा लगता है कि वे पर्यटन और लेखन से जुड़े लोगों की भावनाओं को महसूस करते हुए उनके प्रतिनिधि के रूप मे अपनी लेखनी चलाई है.

उनकी यह बारहवीं कृति “अपना आकाश” का नाम सुनकर ,पढ़कर मुझे उनकी पहली कृति “चांपा : अतीत से वर्तमान तक” के लोकार्पण समारोह की याद आ गई. उस वक्त समीक्षा करते हुए एक दो वरिष्ठ साहित्यकारों ने ” चांपा : अतीत से वर्तमान तक के नामकरण पर थोड़ा असहमति जताते हुए कहा था कि पुस्तक का यह नाम दीर्घ काल तक तर्कसंगत नहीं रह पाएगा क्योंकि इस पुस्तक को पढ़ने के बाद तुरंत यह “वर्तमान” से “भूत ” मे बदल जाएगा और वर्तमान शब्द की प्रासंगिकता नहीं रह जाएगी .इस वाक्या को याद करते हुए डा.रमाकांत सोनी जी की यह पुस्तक”अपना आकाश ” के नामकरण के बारे मे सोचता हूं तो ऐसा लगता है कि उन्होंने इस बार अपनी पुस्तक का नाम बहुत सोच-समझकर रखा है.

कहते हैं कि यादें अपनी ओर पीछे नहीं खींचती बल्कि वे हमे यह बताती है कि हम कहां से यहां तक पहुंचे हैं .डा.रमाकांत सोनी जी ने भी अपनी कृति “अपना आकाश” मे अपने अंतर्मन की यात्रा को शब्द चित्र के रूप में प्रगट करते हुए जीवन के इस पड़ाव मे अभी वे कहां तक पहुंचे हैं इसी बात से हम सबको अवगत कराया है .”आकाश” की कोई सीमा नहीं होती वो अनंत है और इस अनंत आकाश मे अभी डा.रमाकांत सोनी जी को अपने विचारों का पंख लगाकर दीर्घ काल तक उड़ान भरना है.

जन आंदोलन का नेतृत्व और नगर पालिका के समारोहों का संचालन

डा.रमाकांत सोनी जी का व्यक्तित्व केवल साहित्यिक सृजन तक सीमित नहीं रहा है. एक दशक तक सक्रिय पत्रकारिता के माध्यम से जहां वे अपनी लेखनी के माध्यम से जनता से जुड़े विषयों को बखूबी सबके सामने रखते थे तो वहीं दूसरी ओर नगर हित के लिए चलने वाले हर जन आंदोलन मे नेतृत्व कर्ता के रूप मे अपनी भूमिका भी निभाते रहें हैं . नब्बे के दशक मे मै भी पत्रकारिता से जुड़ा हुआ था .तब सोनी जी चांपा प्रेस क्लब के संस्थापक अध्यक्ष थे . उन्होंने मुझे प्रेस क्लब से जोड़ा था .चांपा प्रेस क्लब को बिलासपुर प्रेस क्लब से संबद्धता दिलाते हुए प्रेस क्लब के बेनर तले बिलासपुर रेल जोन के लिए सड़कों पर जन आंदोलन का नेतृत्व उन्होंने ही किया था.

इसके अलावा डा.रमाकांत सोनी जी 1983 के जन आंदोलन ( चांपा गोली कांड) के साथ ही चांपा को जिला बनाने, चांपा मे व्यवहार न्यायालय स्थापना, विद्यार्थी परिषद द्वारा कन्या हाई स्कूल नवीन भवन निर्माण तथा शा.बा उ.मा.शाला मे व्याप्त समस्याओं को लेकर चलने वाले आंदोलनों का मार्गदर्शन करते रहे हैं .एक बार नगर पालिका परिषद द्वारा भालेराव मैदान मे आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह मे संचालक (शासकीय महाविद्यालय के प्राध्यापक बी डी दीवान ) ने शासकीय पत्राचार के अनुसार शिक्षक को निम्न श्रेणी शिक्षक कहकर संबोधित किया तब सोनी जी ने माइक पर ही संचालक से अनुरोध किया कि आज राष्ट्रीय पर्व जैसे अवसर पर शिक्षकों को निम्न श्रेणी जैसे शब्दों से संबोधित न किया जाए.

इतना सुनते ही संचालक महोदय असहज हो गए थे और समारोह का संचालन करने से इंकार करने लगे थे.उस वक्त हम अपने विद्यार्थी परिषद की टीम के साथ (जिसमें वर्तमान पालिकाध्यक्ष प्रदीप नामदेव भी शामिल थे ) डा.रमाकांत सोनी जी के पक्ष मे खुल कर खड़े हुए थे .और संभवतः इसी घटना के बाद से ही नगर पालिका परिषद द्वारा डा.रमांकात सोनी जी को संचालक के रूप मे आमंत्रित किया जाने लगा.

स्थानीय, जिला, प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान…

सम्मान के विषय मे यदि वर्तमान स्थिति को देखते हुए कहूं तो शायद गलत नहीं होगा कि कुछ संस्था या लोग आज सम्मान को बेचने खरीदने का विषय बना चुके हैं और प्रकाशन के आड़ मे एक निश्चित राशि की मांग करते हुए सम्मान किए जाने का प्रलोभन दिया जाता है. यहां तक कि कुछ संस्था तो लोगों को डाक्टर की उपाधि भी प्रदान कर देते हैं . लेकिन हमारे लिए यह गर्व की बात है कि डा.रमाकांत सोनी जी इस बाजारू सम्मान की आडंबर मे कभी नही फंसे.और उन्हें स्थानीय हो जिला हो प्रदेश हो या राष्ट्रीय स्तर पर जो भी सम्मान मिला है उसमें उनकी लेखनी की सत्यता और सम्मान देने वाले व्यक्तियों या संस्थाओं की आत्मीयता समाहित है.

अभी हाल मे ही डा.रमाकांत सोनी जी को छत्तीसगढ़ राज भाषा आयोग और अंतर्राष्ट्रीय सक्रिय साहित्यिक कादंबरी संस्था जबलपुर द्वारा सम्मानित किया गया है. इस समारोह मे देश भर से एक सौ तेइस स्थानों से साहित्यकार उपस्थित थे. इनके अलावा उन्हें अब तक डेढ़ दर्जन सम्मान मिल चुके हैं इन सम्मानों की जानकारी उन्होंने अपनी कृति “अपना आकाश” मे विस्तार से दिया है.

डा.सोनी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर शोध नगर के लिए गौरव की बात …

शिक्षिका सरोजनी डड़सेना द्वारा डा.रमाकांत सोनी जी के व्यक्तित्व और कृतित्व को रेखांकित करते हुए “छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति मे डा.रमाकांत सोनी के ग्रंथों का साहित्यिक अध्ययन” विषय पर एक छात्रा के रूप मे शोध किया जाना निश्चित रूप से हमारे अक्षर साहित्य परिषद के साथ ही चांपा नगर के लिए गौरव की बात है . क्योंकि यहां पी एच डी करने वाले अनेक लोग हैं लेकिन जिनको लेकर पी एच डी किया गया हो ऐसे एक ही व्यक्तित्व है और वे हैं डा. रमाकांत सोनी. डा.सोनी ने ” मुलाकात एक शोध छात्रा से ” शीर्षक देते हुए
छात्रा का उनके घर आना और उनके कृतित्व पर शोधकार्य करने की चर्चा किए जाने के भावनात्मक क्षण को भी “अपना आकाश” मे उल्लेखित किया है.

एक सच्चे और समर्पित साहित्यकार का धर्म केवल किताबों की रचना करने तक सीमित नहीं रहता बल्कि साहित्य के क्षेत्र मे भावी पीढ़ी तैयार करने की जिम्मेदारी भी रहती है. यही कारण है कि डा.रमाकांत सोनी जी अपनी कृतियों को पढ़ने और उस पर अपने विचार प्रगट करने के लिए पाठकों को उत्साहित करते रहते हैं.

डा. रमाकांत सोनी जी की किताब “अपना आकाश” मुझे एक महीने पहले ही मिल चुका था और मैंने थोड़ा सा पढ़ भी लिया था लेकिन इस बीच मै अपने दुकान की मरम्मत कार्य कराने और फिर गंगासागर, कामख्या देवी दर्शन गुवाहाटी, मेघालय की यात्रा पर निकल गया.यात्रा से आए दो चार दिन हुए थे फिर 27 जनवरी को घर पर ही फिसलकर गिरने की वजह से मेरे पैर के घुटने की हड्डी चटक ( फैक्चर) गई.डाक्टर ने इक्कीस दिन विश्राम करने को कहा है इसी बीच मैंने डा.रमाकांत सोनी जी की किताब “अपना आकाश” को पढ़ा और पढ़ते पढ़ते महसूस भी किया कि पुस्तक व्यक्ति के लिए एक अच्छा मित्र है जो एकांकी पन को दूर कर विचारों के आकाश मे उड़ने को प्रेरित करता है .

“अपना आकाश” के प्रकाशन के लिए डा.रमाकांत सोनी जी को बहुत बहुत बधाई.दीर्घ काल तक साहित्याकाश मे विचरण करते रहे और लोगों को साहित्य पठन पाठन और लेखन के लिए प्रेरित करते रहें इन्हीं कामनाओं के साथ..

अनंत थवाईत
चांपा
जिला जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़

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