
जांजगीर–चांपा। ग्राम कुटरा आज स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के कारण सुर्खियों में है। यहां अस्पताल और मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े संस्थानों का निर्माण तेजी से हो रहा है। लेकिन इसी गांव में शिक्षा की तस्वीर बेहद दर्दनाक और चिंताजनक है। यहां के बच्चे आज भी एक ऐसे जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर हैं, जो कभी भी हादसे का कारण बन सकता है।
रामसरकार शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला का भवन लगभग 70 वर्ष पुराना है। समय के थपेड़ों ने इसे खंडहर में बदल दिया है। दीवारों में गहरी दरारें, झड़ता प्लास्टर, कमजोर छत और टूटते कमरे हर पल खतरे की कहानी बयां कर रहे हैं। मासूम बच्चे किताबें हाथ में लिए इसी डर के साए में रोज स्कूल पहुंचते हैं कि न जाने कब कोई दीवार या छत उनके ऊपर गिर जाए।
ग्रामीणों की चिंता अब आक्रोश में बदल रही है। ग्राम पंचायत कुटरा के संरक्षक राघवेन्द्र पाण्डेय ने कलेक्टर को पत्र लिखकर जर्जर भवन को शीघ्र गिराकर नया भवन बनाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1954 में स्व. मालिकराम पाण्डेय ने जनसहयोग से इस विद्यालय का निर्माण कराया था, लेकिन आज वही भवन बच्चों के लिए खतरा बन गया है।
फिलहाल स्कूल का संचालन वैकल्पिक कमरों में हो रहा है, जहां न सुविधाएं हैं, न सुरक्षा। बच्चे भय और असुरक्षा के माहौल में पढ़ने को मजबूर हैं।
राघवेन्द्र पाण्डेय ने कहा, “बच्चों की जान सबसे कीमती है। उन्हें सुरक्षित माहौल देना हमारी जिम्मेदारी है।”
ग्रामीणों का सवाल है—जहां मेडिकल कॉलेज बन सकता है, वहां सुरक्षित स्कूल क्यों नहीं? अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि कब इन मासूमों को सुरक्षित भविष्य मिलेगा।