हाईकोर्ट ने 380 क्विंटल धान खरीदी मामले में कलेक्टर को दिए 15 दिन में फैसला लेने का निर्देश

जांजगीर चांपा। बलौदा क्षेत्र के ग्राम कोरबी धान खरीदी केंद्र में 380 क्विंटल धान की बिक्री करने के लिए डोंगरी निवासी मनोज कुमार/ गोविंद प्रसाद, भागीरथी साव पुत्र शंकरलाल व श्रीमती ज्ञानप्रभा ने अपने परिसर में रखा था। उक्त धान की बिक्री के लिए टोकन भी कट गया था, लेकिन कलेक्टर के मार्गदर्शन में गठित टीम ने धान को जब्त कर लिया। इसके चलते 31 जनवरी तक धान की बिक्री नहीं हो सकी। इससे उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने हाईकोर्ट बिलासपुर से गुहार लगाई। तब हाईकोर्ट बिलासपुर ने 380 क्विंटल धान जब्ती और खरीदी में देरी के मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर जांजगीर-चांपा को 15 दिनों के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायाधीश नरेश कुमार चंद्रवंशी द्वारा पारित किया गया।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा क्षेत्र के ग्राम डोंगरी निवासी उक्त किसानों द्वारा वर्ष 2026 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने लगभग 380 क्विंटल धान उपार्जन केंद्र के माध्यम से बेचने के लिए रखा था। धान बेचने के लिए टोकन भी कट गया था, लेकिन आरोप है कि मंडी प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की लापरवाही के चलते उनका धान जब्त कर लिया गया, जबकि धान की अंतिम खरीदी तिथि 31 जनवरी 2026 से पहले ही यह कार्रवाई की गई थी। इसके कारण किसान शासन की समर्थन मूल्य योजना का लाभ नहीं ले सके।
अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप
याचिका में बताया गया कि किसानों ने समय रहते कलेक्टर कार्यालय में कई बार आवेदन प्रस्तुत किए, जिनकी तारीखें 8 जनवरी, 15 जनवरी और 19 जनवरी 2026 थीं। बावजूद इसके, इन आवेदनों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। किसानों का आरोप है कि तहसीलदार, मंडी निरीक्षक और अन्य अधिकारियों की उदासीनता के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
हाईकोर्ट में रखी गई मांग
याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि जब्त किए गए धान को मुक्त किया जाए, समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित की जाए, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए, किसानों को योजना का लाभ दिलाया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि समय पर खरीदी होती तो उन्हें किसी प्रकार की हानि नहीं होती।
कोर्ट का अहम आदेश
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि कलेक्टर जांजगीर-चांपा किसानों के आवेदन पर शीघ्र निर्णय लें, 15 दिनों के भीतर मामले का निपटारा करें, यदि कोई अनियमितता नहीं पाई जाती है तो धान की नियमानुसार खरीदी सुनिश्चित की जाए, किसानों को योजना का लाभ दिया जाए। न्यायालय ने यह भी कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र किसानों तक समय पर पहुंचना आवश्यक है और इसमें लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी संकेत दिया कि यदि भविष्य में ऐसे मामलों में लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। इससे प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही तय होगी।
किसानों में खुशी की लहर
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद क्षेत्र के किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई है। किसानों का कहना है कि लंबे समय से वे न्याय के लिए संघर्ष कर रहे थे और अब उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही उनका धान खरीदा जाएगा। स्थानीय किसान संगठनों ने भी कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए इसे किसानों के हित में ऐतिहासिक बताया है।
जिला प्रशासन पर टिकी निगाहें
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला प्रदेश के अन्य किसानों के लिए भी मिसाल बनेगा। इससे यह संदेश जाएगा कि यदि प्रशासन समय पर कार्य नहीं करता, तो किसान न्यायालय की शरण लेकर अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं। 380 क्विंटल धान प्रकरण में हाईकोर्ट का यह आदेश किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हुआ है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह कितनी तत्परता से कोर्ट के निर्देशों का पालन करता है। यदि समय पर कार्रवाई होती है, तो न केवल प्रभावित किसानों को लाभ मिलेगा, बल्कि सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वास भी मजबूत होगा।