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मेधावी छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करे शिक्षा मंडल, पेपर लीक की पुनरावृत्ति व्यवस्था की विफलता: नम्रता नामदेव

बलौदा: छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं बोर्ड परीक्षा के हिंदी प्रश्न पत्र के लीक होने और उसके पश्चात पुनः परीक्षा आयोजित किए जाने के निर्णय पर श्रीमती नम्रता नामदेव (पूर्व अध्यक्ष, शिक्षा स्थाई समिति, जनपद पंचायत बलौदा एवं सचिव, जिला कांग्रेस कमेटी) ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए मंडल की कार्यप्रणाली पर तीखे और मर्यादित प्रहार किए हैं।

श्रीमती नामदेव ने जारी बयान में कहा कि, “छत्तीसगढ़ के दूरस्थ अंचलों से लेकर शहरों तक के बच्चों ने साल भर अथक परिश्रम कर बोर्ड परीक्षा की तैयारी की थी। भीषण गर्मी और मानसिक दबाव के बीच परीक्षा देने के बाद, अब प्रश्न पत्र लीक होने के कारण उन्हें दोबारा परीक्षा की अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ रहा है। इसमें मासूम बच्चों की क्या गलती है? मंडल अपनी अक्षमता का दंड उन विद्यार्थियों को क्यों दे रहा है जिन्होंने ईमानदारी से पढ़ाई की है?”

उन्होंने सीधे तौर पर शिक्षा मंडल की गोपनीयता और सुरक्षा प्रबंधों पर सवाल उठाते हुए कहा कि बार-बार प्रश्न पत्रों का बाहर आना यह दर्शाता है कि व्यवस्था के भीतर गंभीर खामियां हैं। मंडल आखिर क्यों प्रश्न पत्रों की शुचिता बनाए रखने में विफल साबित हो रहा है? यह केवल एक पेपर का लीक होना नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों बच्चों के भरोसे का टूटना है।
मंडल को सुझाव एवं मांगें:

श्रीमती नम्रता नामदेव ने बच्चों के हित में अपनी बात रखते हुए कहा कि दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिए। केवल परीक्षा दोबारा कराना समाधान नहीं है। उन केंद्रों और अधिकारियों को चिन्हित किया जाए जिनकी लापरवाही से पेपर बाहर आया। उन पर ऐसी दंडात्मक कार्रवाई हो जो भविष्य के लिए नजीर बने। उन्होंने सुझाया कि डिजिटल सुरक्षा का सुदृढ़ीकरण हो । भविष्य में प्रश्न पत्रों के वितरण के लिए ‘एन्क्रिप्टेड’ डिजिटल सिस्टम का उपयोग किया जाए, ताकि पेपर खुलने के समय की हो सके।

उन्होने छात्रों के लिए मानसिक परामर्श देते कहा कहा कि परीक्षा के इस तनावपूर्ण माहौल में बच्चों के लिए विशेष काउंसलिंग की व्यवस्था की जाए ताकि वे दोबारा परीक्षा के लिए आत्मविश्वास जुटा सकें।

परीक्षा केंद्रों का विकेंद्रीकरण और निगरानी पर जोर देते हुए नम्रता नामदेव ने कहा कि संवेदनशील केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी और उड़न दस्तों की सक्रियता बढ़ाई जाए।
अंत में उन्होंने मांग की है कि मंडल अविलंब अपनी सुरक्षा नीतियों की समीक्षा करे ताकि दोबारा किसी भी विषय की परीक्षा रद्द करने की नौबत न आए और बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहे।

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