
जांजगीर चांपा। आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग द्वारा जिले के सभी उर्वरक संग्रहण केन्द्रों एवं सेवा सहकारी समितियों में व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। फ्लैक्स एवं कृषि विभाग के मैदानी अमलों के माध्यम से किसान भाईयों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
खरीफ फसलों में सामान्यतः किसान यूरिया, डीएपी एवं पोटाश का उपयोग करते हैं। लेकिन भूमि की उर्वरकता शक्ति बनाए रखने, फसल उत्पादन बढ़ाने तथा खेती की लागत को कम करने के लिए संतुलित उर्वरकों का उपयोग करना अत्यंत आवश्यक है।
कृषि विभाग द्वारा किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे डीएपी उर्वरक के साथ-साथ अन्य वैकल्पिक उर्वरकों एवं रासायनिक खाद समूहों का भी संतुलित रूप से उपयोग करें, ताकि मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहे और बेहतर उत्पादन प्राप्त हो सके।
उप संचालक कृषि राकेश शर्मा ने किसान भाईयों से अपील की है कि वे वैज्ञानिक पद्धति अपनाते हुए संतुलित उर्वरकों का उपयोग करें और कृषि को अधिक लाभकारी बनाएं।