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मां समलेश्वरी के दरबार में हर नवविवाहित जोड़ा होता है नतमस्तक, चांपा की कुलदेवी मां सम्लेश्वरी की महिमा अपरंपार

ऐतिहासिक तथ्य पर आधारित महत्वपूर्ण जानकारी जमींदार परिवार के इतिहास और आस्था से जुड़ा है प्राचीन मंदिर

जांजगीर चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के चांपा शहर में स्थित मां सम्लेश्वरी देवी का मंदिर धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और पारंपरिक मान्यताओं का महत्वपूर्ण केंद्र है। मां सम्लेश्वरी को चांपा की कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि मां के दरबार में सच्चे मन से माथा टेकने और आशीर्वाद लेने से जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। यही वजह है कि दांपत्य जीवन की शुरुआत करने से पहले अनेक जोड़े यहां पहुंचकर मां का आशीर्वाद लेते हैं।

जमींदार विश्वनाथ सिंह ने कराया था मंदिर का निर्माण

ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार, मां सम्लेश्वरी मंदिर की स्थापना वर्ष 1760 में तत्कालीन चांपा जमींदार विश्वनाथ सिंह ने कराई थी। उन्होंने मंदिर का निर्माण कराने के साथ देवी प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा भी कराई थी। मंदिर की स्थापना का संबंध उस दौर के क्षेत्रीय इतिहास और रियासतों के बीच हुए संघर्षों से भी जुड़ा हुआ है।

बताया जाता है कि उस समय हसदेव नदी का पूर्वी भाग ओडिशा की संबलपुर रियासत तथा पश्चिमी भाग रतनपुर रियासत के अंतर्गत आता था। संबलपुर रियासत द्वारा रतनपुर पर आक्रमण किए जाने के बाद चांपा के जमींदार परिवार ने रतनपुर नरेश का साथ दिया और युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

युद्ध में विजय के बाद स्थापित हुई चांपा जमींदारी

ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, युद्ध में विजय के बाद जीते गए भू-भाग का एक हिस्सा चांपा जमींदार परिवार को प्रदान किया गया। इसके बाद चांपा जमींदारी की स्थापना हुई, जिसे मदनपुर 84 के नाम से भी जाना जाता है। जमींदार परिवार ने चांपा को अपनी राजधानी बनाया और यहां महामाया मंदिर का निर्माण कराया। इसी ऐतिहासिक क्रम में संबलपुर क्षेत्र से प्राप्त भू-भाग पर मां सम्लेश्वरी देवी का मंदिर स्थापित किया गया।

समय के साथ यह मंदिर चांपा के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया। आज भी श्रद्धालु मां सम्लेश्वरी के प्रति गहरी आस्था रखते हैं और विभिन्न धार्मिक अवसरों पर दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं।

विवाह से पहले मां का आशीर्वाद लेने की परंपरा

मां सम्लेश्वरी मंदिर की एक विशेष पहचान दांपत्य जीवन से जुड़ी मान्यता भी है। स्थानीय परंपरा के अनुसार, विवाह से पहले कई जोड़े मंदिर पहुंचकर मां के दर्शन करते हैं और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां की कृपा से परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और आपसी प्रेम बना रहता है।

आस्था और इतिहास की अनमोल धरोहर

मां सम्लेश्वरी मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि चांपा की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है। करीब ढाई शताब्दियों से अधिक पुरानी इस परंपरा ने अनेक पीढ़ियों की आस्था को अपने साथ जोड़े रखा है। मंदिर का इतिहास चांपा के जमींदार परिवार, क्षेत्रीय राजनीतिक घटनाक्रम और धार्मिक परंपराओं की याद दिलाता है।

आज मां सम्लेश्वरी का दरबार श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मां के प्रति अटूट विश्वास और पीढ़ियों से चली आ रही पूजा परंपरा चांपा की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को विशिष्ट बनाती है।

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