गंदे तालाब में होगा जंवारा विसर्जन! गंदगी और जलकुंभी से कराह रहा ऐतिहासिक रामबांधा तालाब
चांपा की धरोहर की बदहाली पर जिम्मेदारों की चुप्पी, 99 एकड़ में फैले तालाब की दुर्दशा से श्रद्धालुओं में नाराजगी की आशंका
जांजगीर-चांपा। चांपा की ऐतिहासिक पहचान और आस्था के प्रमुख केंद्र रामबांधा तालाब की बदहाली अब धार्मिक भावनाओं से भी जुड़ता सवाल बन गई है। करीब 99 एकड़ में फैला यह ऐतिहासिक तालाब जलकुंभी और गंदगी से घिरा हुआ है। विडंबना यह है कि चांपा की कुलदेवी मां समलेश्वरी मंदिर में शारदीय नवरात्रि के दौरान विधि-विधान से पूजन-अर्चना के बाद जंवारा विसर्जन इसी तालाब में किया जाएगा। जिस तालाब से शहर की ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक परंपराएं जुड़ी हैं, उसकी बदहाल स्थिति श्रद्धालुओं को निराश कर सकती है और जनभावनाएं आहत होने की आशंका भी है।
हालांकि, जंवारा विसर्जन स्थल के आसपास से जलकुंभी हटाकर सफाई की गई है, लेकिन तालाब के पानी की स्थिति अब भी चिंताजनक बताई जा रही है। पानी में गंदगी के कारण उसका रंग काला नजर आ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या केवल विसर्जन स्थल के आसपास की सफाई से जिम्मेदारी पूरी हो जाती है, या फिर शहर की इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए व्यापक स्तर पर सफाई और संरक्षण की जरूरत है?
नौ करोड़ रुपये से हुआ था सौंदर्यीकरण, फिर क्यों बिगड़ गई हालत?
रामबांधा तालाब की मौजूदा स्थिति को देखकर इसके पुराने स्वरूप और सौंदर्यीकरण के प्रयासों की याद आती है। करीब एक दशक पहले चांपा नगरपालिका में कांग्रेस की सरकार थी, जबकि राज्य में भाजपा की सरकार थी। उस समय तत्कालीन नगरपालिका अध्यक्ष राजेश अग्रवाल की पहल पर लगभग नौ करोड़ रुपये की लागत से तालाब का सौंदर्यीकरण कराया गया था। इसके लिए तालाब का पानी सुखाकर जनसहयोग से जेसीबी के माध्यम से गहरीकरण भी कराया गया था।
लेकिन समय के साथ तालाब के रखरखाव और नियमित सफाई पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। नतीजा यह हुआ कि कभी शहर की पहचान रहा रामबांधा तालाब आज जलकुंभी और गंदगी से घिरा नजर आ रहा है। सवाल यह भी है कि करोड़ों रुपये खर्च कर विकसित की गई धरोहर के संरक्षण और नियमित देखरेख की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
कलेक्टर की पहल के बाद भी सफाई अधूरी
हाल ही में कलेक्टर ने रामबांधा तालाब की सफाई की पहल की थी। उस दौरान सफाई कार्य में जुटे अधिकारी-कर्मचारियों की तस्वीरें भी मीडिया में सामने आई थीं। इससे उम्मीद जगी थी कि तालाब की स्थिति में सुधार होगा, लेकिन इसके बाद व्यापक सफाई का काम आगे बढ़ता नजर नहीं आया। तालाब फिर अपनी पुरानी बदहाली में दिखाई देने लगा।
इधर, शहर कांग्रेस ने भी रामबांधा तालाब की साफ-सफाई सहित नगर की विभिन्न समस्याओं को लेकर प्रशासन को 10 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर जनता के साथ मिलकर आंदोलन किया जाएगा। अब देखना होगा कि प्रशासन इस ऐतिहासिक जलस्रोत की सफाई और संरक्षण को लेकर कितनी गंभीरता दिखाता है।

मां समलेश्वरी पर अटूट आस्था, नवरात्रि में उमड़ते हैं श्रद्धालु
चांपा की कुलदेवी मां समलेश्वरी के प्रति शहरवासियों की गहरी आस्था है। शारदीय नवरात्रि के दौरान मंदिर में जंवारा और घृत ज्योति कलश प्रज्ज्वलित कर विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। अपनी मनोकामनाओं और मन्नतों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। नवरात्रि के दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर से तालाब तक लोट मारकर पहुंचने की परंपरा भी निभाई जाती है। इसके बाद जंवारा विसर्जन रामबांधा तालाब में किया जाएगा।
ऐसे पवित्र अवसर पर तालाब की गंदगी और बदहाल स्थिति लोगों के मन में स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करती है। धार्मिक परंपराओं से जुड़े इस स्थल की स्वच्छता बनाए रखना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि शहर की साझा विरासत और जनआस्था के सम्मान का विषय भी है।
पहले जनसहयोग से होती थी तालाबों की सफाई
स्थानीय स्तर पर पहले तालाबों की सफाई के लिए प्रशासनिक पहल और जनसहयोग के उदाहरण भी रहे हैं। बताया जाता है कि करीब एक दशक पहले कलेक्टरों की पहल पर पावर प्लांट प्रबंधनों के सहयोग से गर्मी के मौसम में चांपा के कई तालाबों की सफाई कराई जाती थी। समय के साथ ऐसे प्रयास कमजोर पड़ गए और तालाबों की स्थिति लगातार बिगड़ती गई।
दूसरी ओर, नगरपालिका आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रही है। ऐसे में तालाब की व्यापक सफाई, जलकुंभी हटाने और नियमित रखरखाव के लिए प्रशासन, नगरपालिका, संबंधित संस्थानों तथा नागरिकों के सामूहिक प्रयास की जरूरत है।
धरोहर बचाने के लिए अब ठोस पहल जरूरी
रामबांधा तालाब केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि चांपा की ऐतिहासिक पहचान, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है। नवरात्रि में जंवारा विसर्जन के अवसर पर इसकी बदहाली एक बार फिर सामने है। ऐसे में जरूरी है कि विसर्जन स्थल की अस्थायी सफाई तक सीमित रहने के बजाय पूरे तालाब की चरणबद्ध सफाई, जलकुंभी हटाने और नियमित देखरेख की ठोस व्यवस्था बनाई जाए।
अब शहरवासियों की निगाहें प्रशासन और नगरपालिका पर टिकी हैं। सवाल साफ है—क्या रामबांधा तालाब की सफाई के लिए इस बार स्थायी कदम उठाए जाएंगे, या चांपा की यह ऐतिहासिक धरोहर बदहाली के बीच ही अपनी अगली नवरात्रि का इंतजार करती रहेगी?
