छत्तीसगढ़जांजगीर-चांपा

सुदामा और श्रीकृष्ण की कथा भक्ति, मित्रता व विनम्रता का अद्भुत उदाहरण: पं उत्तम मिश्रा

0 बहेराडीह में श्रीमद भागवत ज्ञान कथा में सुदामा चरित्र का वर्णन

जांजगीर चांपा। सच्ची मित्रता कभी पद,धन या स्थिति नहीं देखती। वह ह्रदय से होती है। भक्ति और प्रेम भगवान को भाव चाहिए, भोग नहीं। प्रेम से दिया गया छोटा उपहार भी उन्हें अमूल्य लगता है। विनम्रता सुदामा ने कभी अपमान नहीं किया और न ही मांगने की इक्छा रखी। यह सच्चे संतोष का उदाहरण है। सुदामा और श्रीकृष्ण की कथा भक्ति, मित्रता व विनम्रता का अद्भुत उदाहरण है।

उक्त बातें ग्राम बहेराडीह स्थित माँ दुर्गा चौंक में यादव परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत ज्ञान कथा के अंतिम दिवस सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुये ब्यक्त किया। उन्होंने आगे कहा कि संतोष और विश्वास सुदामा ने परिस्थितियों से हार नहीं मानी। सुदामा ने विश्वास रखा कि भगवान जो करेंगे अच्छा ही करेंगे। कर्म और श्रद्धा जीवन में भक्ति, प्रेम और सच्चाई रखो। बिना मांगे भगवान फल देते हैं। कथा वाचक ने कहा कि जो भगवान से सच्चा विश्वास रखता है और प्रेम से उनका स्मरण करता है। उसे भगवान स्वयं हर कठिनाई से उबार लेते हैं। कथा वाचक पं मिश्रा ने सुदामा और श्रीकृष्ण की कथा में गुरुकुल का समय, सुदामा का गरीब जीवन, सुदामा का उपहार, द्वारिका में सुदामा का स्वागत, सुदामा का लाया गया उपहार, सुदामा की वापसी और मनुष्य जीवन के लिये प्रेरणा का भाव पूर्वक वर्णन किया।

कथा सुनने वालों में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव गिरधारी यादव, बलौदा जनपद के पूर्व उपाध्यक्ष नम्रता राघवेंद्र नामदेव, गुनेश्वर यादव सिवनी, छोटेलाल यादव, लालू कश्यप कमरीद, गोकुल यादव मड़वा,बाबूलाल यादव, कमलेश यादव खैरा, लीला राम यादव,गजाधर कौशिक पूर्व सरपंच कोसमंदा, गुलशन यादव, श्याम लाल यादव, संतोषी यादव बसंतपुर,टेम साय यादव, विशाल नाथ मन्नेवार नवापारा, महेश यादव चम्पा एवं अंचल के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुये।