सिवनी–चांपा सहित कोरबा मार्ग के लिए बनी मात्र 7 मीटर की सड़क पर अब दौड़ने लगी हाइवा, बढ़ रहा दुर्घटना का खतरा

जांजगीर-चांपा। सिवनी से चांपा होते हुए कोरबा की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर बनाई गई लगभग 7 मीटर चौड़ी सड़क पिछले कुछ महीनों से ग्रामीणों के लिए राहत का कारण बनी थी। इस मार्ग के निर्माण से सिवनी, उच्चाभिट्ठी, बालपुर, बहेराडीह और आसपास के गाँवों के लोगों को चांपा नगर तक पहुँचने में पहले की तुलना में सुविधा मिली है। चांपा नगर में एसडीएम, तहसील कार्यालय, पंजीयन कार्यालय, पीएचई, पीडब्ल्यूडी, महाविद्यालय, बैंक और बाज़ार जैसे महत्वपूर्ण संस्थान और सार्वजनिक सुविधाएँ हैं, जिसके कारण इस मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ, किसान, व्यापारी और आम नागरिक आवागमन करते हैं।
हालांकि, इस सड़क पर हाल ही में बड़े मालवाहक वाहनों, विशेषकर हाइवा ट्रकों का चलना शुरू हो गया है, जिससे इस संकरे मार्ग पर दुर्घटनाओं की आशंका काफी बढ़ गई है। 7 मीटर चौड़ी सड़क पर दो पहिया और हल्के वाहन तो किसी तरह से निकल जाते हैं, लेकिन भारी वाहनों के आने-जाने से न केवल टक्करों का खतरा बढ़ जाता है, बल्कि सड़क के किनारे चल रहे पैदल यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाती है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क मूल रूप से हल्के वाहनों और ग्रामीण आवागमन के लिए बनाई गई थी। लेकिन कोयला परिवहन, मिट्टी लोडिंग या निर्माण सामग्री ढोने वाले हाइवा ट्रकों के लिए यह मार्ग बिल्कुल उपयुक्त नहीं है। भारी वाहनों के कारण सड़क में दरारें पड़ने लगी हैं और कई स्थानों पर किनारे टूटने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि इसी तरह बड़े वाहन चलते रहे, तो कुछ ही महीनों में सड़क पूरी तरह से क्षतिग्रस्त होने की संभावना है, जिससे पुनः आवागमन में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
सिवनी और आस-पास के लोगों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि मार्ग के शुरुआत और अंत में कम ऊंचाई (Low Height Barrier Gate) लगाया जाए, ताकि भारी वाहनों का प्रवेश अपने आप रुक जाए। इसके अलावा, इस सड़क पर भारी वाहन निषेध (No Heavy Vehicle Zone) का स्पष्ट बोर्ड लगाने और पुलिस एवं परिवहन विभाग द्वारा समय-समय पर निगरानी की आवश्यकता भी जताई गई है।
ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में छात्र-छात्राओं का आवागमन अधिक होता है। कई स्कूली बच्चे और कॉलेज छात्र साइकिल और बाइक से इसी रास्ते का उपयोग करते हैं। ऐसे में एक भी छोटी लापरवाही बड़ी दुर्घटना का रूप ले सकती है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी कहा कि पिछले दिनों कई बार तेज रफ्तार से गुजरते भारी वाहनों ने लोगों को बाल-बाल टक्कर से बचाया है, जो गंभीर स्थिति का संकेत है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर गंभीरता जताई है और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि ग्रामीणों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सड़क पर भारी वाहनों का प्रवेश रोकना अत्यंत आवश्यक है, अन्यथा भविष्य में बड़ी दुर्घटना या सड़क के पूरी तरह टूट जाने की स्थिति बन सकती है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो वे इस मार्ग को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन और ज्ञापन देने के लिए बाध्य होंगे। प्रशासन की त्वरित पहल ही इस समस्या का समाधान है।