दुर्गा मंदिर सिवनी में देवी भागवत कथा का दूसरा दिवस, आचार्य अशोक तिवारी ने बताए मंत्र-जप और सत्य के महात्म्य

जांजगीर-सिवनी। दुर्गा मंदिर सिवनी में गुप्त नवरात्रि के अवसर पर चल रही देवी भागवत कथा के दूसरे दिवस व्यासपीठ से आचार्य अशोक तिवारी ने श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान और साधना का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि मां जगदम्बा के नाम के एक अक्षर का भी यदि कोई निरंतर मंत्र के रूप में उच्चारण करता रहे, तो उस पर देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और अज्ञानी व्यक्ति भी महाज्ञाता बन सकता है।
कथा के दौरान आचार्य ने सत्यव्रत की कथा का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि देवदत्त का पुत्र गोभिल मुनि के शाप से मूर्ख हो गया था। समाज की निंदा से दुखी होकर वह वन चला गया और वहां सत्य बोलने का संकल्प लिया। इसी संकल्प के बल पर उसके मुख से निकले “ऐ-ऐ” शब्द, जो सरस्वती का बीज मंत्र है, उसके जीवन में चमत्कार बन गए और देवी सरस्वती की कृपा से उसे संपूर्ण विद्या की प्राप्ति हुई।

आचार्य अशोक तिवारी ने नवरात्र पूजा और कन्या पूजन का विस्तार से विधान बताते हुए कहा कि दो से दस वर्ष तक की कन्याओं का विभिन्न देवी स्वरूपों में पूजन करने से धन-धान्य, सुख-समृद्धि और जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है। उन्होंने नर-नारायण की तपस्या, मधु-कैटभ की उत्पत्ति और वध की कथा का भी विस्तारपूर्वक वर्णन किया।
दुर्गा मंदिर में प्रतिदिन आयोजित हो रही इस देवी भागवत कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर कथा श्रवण का लाभ ले रहे।
