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चांपा की महारानी के दर्शन करने उमड़ा आस्था का सैलाब, भव्य पंडाल और आकर्षक प्रतिमा बना श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र

छत्तीसगढ़ में पहली बार टेराकोटा हस्तशिल्प थीम पर सजा सिवनी चौक का पंडाल, पारंपरिक लोककला और दिव्य प्रतिमा के दर्शन के लिए उमड़ रहे श्रद्धालु

जांजगीर-चांपा। कोसा, कांसा और कंचन की नगरी चांपा में शारदीय नवरात्रि की रौनक अपने चरम पर है। शहर के कोरबा रोड स्थित सिवनी चौक में विराजमान ‘चांपा की महारानी’ मां दुर्गा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। भव्य प्रतिमा, आकर्षक साज-सज्जा और अनूठी कलात्मकता से सजे पंडाल ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया है। आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह है और अब तक लाखों लोगों के दर्शन करने का दावा किया जा रहा है।

टेराकोटा हस्तशिल्प थीम ने खींचा सबका ध्यान

इस वर्ष नवरात्रि महोत्सव का सबसे खास आकर्षण सिवनी चौक में तैयार किया गया भव्य टेराकोटा हस्तशिल्प थीम पर आधारित पंडाल है। पारंपरिक शिल्पकला और लोकसंस्कृति को केंद्र में रखकर तैयार किए गए इस पंडाल की अनूठी परिकल्पना लोगों को आकर्षित कर रही है। आयोजकों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में पहली बार इस तरह की थीम का प्रयोग किया गया है।

पंडाल की कल्पना में पश्चिम बंगाल के माकोड़ा क्षेत्र की पारंपरिक हस्तशिल्प कला से प्रेरणा ली गई है। प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक शिल्प सामग्री के कलात्मक इस्तेमाल से पंडाल को ऐसा स्वरूप दिया गया है, जिसमें भारतीय लोककला, ग्रामीण हुनर और सांस्कृतिक विरासत की खूबसूरत झलक दिखाई देती है।

बांस की टोकरियों और चूड़ियों से सजा अनूठा पंडाल

पंडाल की सजावट में बांस और अन्य प्राकृतिक संसाधनों से तैयार टोकरियों, चूड़ियों सहित विभिन्न हस्तशिल्प सामग्रियों को कलात्मक ढंग से शामिल किया गया है। इन सामग्रियों के संयोजन से तैयार डिजाइन पंडाल को विशिष्ट पहचान दे रहा है। पारंपरिक कला और आधुनिक सजावट के मेल ने इसे नवरात्रि महोत्सव का प्रमुख आकर्षण बना दिया है।

यह पंडाल केवल धार्मिक आयोजन का स्थल ही नहीं, बल्कि लोककला और पारंपरिक शिल्प को करीब से देखने का अवसर भी प्रदान कर रहा है। यही वजह है कि मां दुर्गा के दर्शन के साथ श्रद्धालु पंडाल की कलात्मक सजावट को निहारने के लिए भी पहुंच रहे हैं।

भटगांव के प्रसिद्ध मूर्तिकार ने तैयार की चांपा की महारानी

महोत्सव का दूसरा बड़ा आकर्षण मां दुर्गा की भव्य और मनोहारी प्रतिमा है। भटगांव के प्रसिद्ध मूर्तिकार ने चांपा की महारानी की प्रतिमा तैयार की है। प्रतिमा में पारंपरिक मूर्तिकला की बारीकियों, आकर्षक आभूषणों और दिव्य स्वरूप को विशेष महत्व दिया गया है। मां दुर्गा का मनमोहक रूप श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति करा रहा है।

मां दुर्गा के साथ भगवान गणेश, मां लक्ष्मी, मां सरस्वती और भैरव बाबा की सुंदर प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं। सभी प्रतिमाओं की भव्यता और साज-सज्जा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मां के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं और पूरा परिसर जयकारों तथा भक्ति भाव से गूंज रहा है।

शतचंडी महायज्ञ के साथ हुआ महोत्सव का शुभारंभ

नवरात्रि महोत्सव का शुभारंभ शतचंडी महायज्ञ के साथ हुआ। धार्मिक अनुष्ठानों और विधि-विधान से हो रही पूजा-अर्चना के बीच मां दुर्गा की आराधना जारी है। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं के साथ माता के दरबार में पहुंच रहे हैं। शाम होते ही सिवनी चौक और आसपास का क्षेत्र रोशनी, सजावट और भक्तिमय वातावरण से जगमगा उठता है।

आस्था, परंपरा और लोककला का अनूठा संगम

चांपा की महारानी का दरबार इस बार धार्मिक आस्था के साथ-साथ पारंपरिक हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत का भी संदेश दे रहा है। टेराकोटा थीम पर आधारित भव्य पंडाल, मां दुर्गा की दिव्य प्रतिमा और शतचंडी महायज्ञ ने नवरात्रि महोत्सव को विशेष बना दिया है। यही कारण है कि सिवनी चौक का यह आयोजन चांपा सहित आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

मां दुर्गा के जयकारों से गूंजते चांपा में ‘चांपा की महारानी’ के दर्शन के लिए आस्था का सैलाब उमड़ रहा है। श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन भक्ति, संस्कृति और परंपरा का ऐसा संगम बन गया है, जिसकी छटा नवरात्रि के उत्साह को और भी खास बना रही है।

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