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POLITICAL NEWS: यहां हमेशा से कांग्रेस-भाजपा को कड़ी टक्कर देती रही है बसपा, चुनाव दर चुनाव बसपा का बढ़ता गया वोटों का आंकड़ा

हरि अग्रवाल@ जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ में चुनावी बिसात बिछ चुकी है। बसपा के बाद आज भाजपा ने भी प्रदेश के 21 सीटों के लिए प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है। प्रदेश का सबसे चर्चित सीटों में जांजगीर चांपा सीट भी शामिल है, जहां हमेशा से बसपा कड़ी टक्कर देती रही है। जांजगीर चांपा सीट से बसपा ने अपनी पहली सूची में राधेश्याम सूर्यवंशी को मैदान में उतारा है। वैसे भी हर बार इस सीट से बसपा ने बढ़त ही ली है। पिछले चुनाव में आंकड़ा 33 हजार के पार था। इस लिहाज से यदि इस बार भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी चयन में जरा सी चूक बीएसपी को जीत दिला सकती है।

विधानसभा चुनाव के लिए सरगर्मी तेज होने लगी है। भाजपा और कांग्रेस से दावेदारों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है। इस सीट से पिछले पांच चुनाव में भाजपा और कांग्रेस एक ही प्रत्याशी को बार-बार मौका दे रहीं है, जिससे आम जनता पूरी तरह इन दोनों से उब चुकी है। लेकिन बसपा से कोई जनता के विश्वसनीय चेहरा मैदान में नहीं होने के कारण यहां का चुनाव इन्हीं दो किरदारों के मध्य सिमटती रही है। खास बात यह है कि जिले के पामगढ़ व जैजैपुर की तरह यहां भी बसपा की प्रभावपूर्ण भूमिका रही है। वर्ष 2003 के चुनाव में बसपा के उदल किरण को 15009 वोट मिले थे। वहीं 2008 के चुनाव में बसपा के रविंद्र द्विवेदी ने 18113 दोनों दल को प्रभावित किया था। इसी तरह 2013 के चुनाव में बसपा के अमर सिंह राठौर ने 27487 वोट पाकर कड़ी टक्कर दी थी। 2018 के चुनाव में तो बसपा के व्यास कश्यप ने 33505 पाकर दोनों प्रमुख दलों को चुनौती दी थी। इससे समझा जा सकता है कि जांजगीर चांपा सीट में बसपा को नकार पाना इतना आसान नहीं है।

पहले ही यहां कांग्रेस के 16 दावेदारों का चिन्हांकन
इधर, कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर घमासान मच गया है। उपर से कांग्रेस में गुटबाजी भी नई बात नहीं है। हाल ही में जब जांजगीर में विधानसभा स्तरीय प्रशिक्षण शिविर हुआ, तो उसमें सफेद कव्हर लगी 16 दावेदारों की कुर्सी सजाई गई थी। इसके मुताबिक जिला कांग्रेस ने तो पहले ही इस सीट के लिए 16 दावेदारों का चिन्हांकन कर दिया है। इसके अलावा भी कई दावेदार है। अभी ब्लाक के जरिए कांग्रेस दावेदारों का आवेदन ले रहा है। इस लिहाज से जब प्रत्याशी की घोषणा होगी, उस समय का नजारा काफी दिलचस्प होगा।

जांजगीर चांपा सीट से बदल सकता है चेहरा
तत्कालीन पीसीसी अध्यक्ष मोहन मरकाम ने जब जांजगीर में कार्यकर्ताओं की बैठक ली थी, तो उसी समय जांजगीर चांपा सीट से चेहरा बदलने की मांग करते हुए काफी शोर शराबा किया था। सभी ने एकस्वर में इस बार नए चेहरे की मांग की थी। यदि इसके बाद भी कार्यकर्ताओं की मांग को अनसुना करते हुए कांग्रेस पुराने चेहरे को यहां रिपीट करती है तो इसका खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ सकता है। क्योंकि पहले ही सक्ती जिला विभाजन के बाद जांजगीर चांपा जिले के तीनों सीट कांग्रेसविहीन है। ऐसे में इस बार कांग्रेस के लिए ये तीनों सीटे जीतना बड़ी चुनौती होगी। जानकारों का कहना है कि कांग्रेस इस बार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।