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POLITICAL NEWS: जांजगीर चांपा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं डॉ. महंत, जांजगीर में शैलजा के समक्ष हुए घटनाक्रम ने दिए कई संकेत

जांजगीर चांपा। कहते हैं राजनीति में कब, क्या हो जाए, कहा नहीं जा सकता। कभी करीबी माने जाने वाले वरिष्ठ कांग्रेसी व पूर्व मंत्री राजा सुरेन्द्र बहादुर सिंह ने अपने दत्तक पुत्र धर्मेन्द्र सिंह के लिए जांजगीर पहुंचे छ.ग. कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा के समक्ष दावेदारी पेश की। वहीं राठौर समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले मनहरण राठौर ने भी शक्ति प्रदर्शन करते हुए शैलजा के समक्ष ताल ठोंकी। चुनाव के ऐनपहले सक्ती की सियासत में इस तरह उबाल आना अच्छे संकेत नहीं है। राजनीति के जानकारों का मानना है इन दोनों के इस तरह डॉ. महंत का खुलकर विरोध करने से उनकी राह कठिन है। कयास लगाए जा रहे हैं ऐसे में डॉ. महंत अपने पुराने सीट जांजगीर चांपा से किस्मत आजमा सकते हैं।

बता दें कि स्व. बीडी महंत चांपा विधानसभा सीट से कई चुनाव लड़े हैं। उनके बाद इस सीट से पहली बार 1980 में डॉ. महंत ने चुनाव लड़ा और 17201 वोटों से भाजपा के बलिहार सिंह को हराया। इसके बाद वो इस सीट से लगातार 1993 तक चार बार चुनाव लड़े, जिसमें तीन बार उन्हें जीत मिली। एक बार 1990 में भाजपा के बलिहार सिंह ने 1993 वोटों से उन्हें हराया था। इस लिहाज से भी देखा जाए तो डॉ. महंत परिवार का यह पारंपरिक सीट रहा है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत अभी सक्ती के मौजूदा विधायक हैं। बताया जाता है वर्ष 1998 के चुनाव में पूर्व मंत्री राजा सुरेन्द्र बहादुर सिंह और मनहरण राठौर को अपने पक्ष में करने के बाद ही अंतिम दौर में उन्होंने चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार दोनों ने दावेदारी पेश कर डॉ. महंत के खिलाफ खुलकर विरोध की है। इससे इस बार सक्ती से डॉ. महंत की डगर कठिन नजर आ रहा है। जानकारों का मानना है कि राठौर समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले मनहरण राठौर ओबीसी वर्ग से हैं और सक्ती क्षेत्र में बड़े नेता के रूप में माने जाते हैं, तो वहीं पूर्व मंत्री व वरिष्ठ कांग्रेसी नेता राजा सुरेंद्र बहादुर सिंह आदिवासियों के लिए मसीहा से कम नहीं है। उनकी आदिवासी वर्ग में दशकों से अच्छी पकड़ है। इन दोनों बड़े नेताओं की नाराजगी से सक्ती विधानसभा में काफी उठा पटक देखने को मिल सकता है। वहीं इसका खामियाजा मौजूदा विधायक डॉ. चरण दास महंत को भी भुगतना पड़ सकता है। अब देखना काफी दिलचस्प होगा कि डॉ. महंत इन दोनों प्रमुख नेताओं की नाराजगी समय रहते दूर कर पाते हैं या नहीं।

भीतरघात होने की संभावना
राजनीति के जानकारों का यह भी मानना है कि यदि इन सबके बावजूद डॉ. महंत सक्ती से चुनाव लड़ते हैं तो भीतरघात होने की संभावना प्रबल है। क्योंकि एक तरफ जहां पूर्व मंत्री राजा सुरेन्द्र बहादुर सिंह अपने दत्तक पुत्र धर्मेन्द्र सिंह के लिए टिकट मांग रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर मनहरण राठौर अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में समय रहते दोनों को अपने पक्ष में किए डॉ. महंत का सक्ती से चुनाव जीत पाना बड़ी चुनौती है। हालांकि राजनीति में कब क्या हो जाए कहा नहीं जा सकता। क्योंकि अभी कांग्रेस में जिस तरह के हालात है, उसे देखकर समझा सकता है कि पल पल खेल बदल रहा है। इससे माना जा सकता है कि समय रहते इन दोनों नेताओं की नाराजगी दूर कर ली जाएगी।

जांजगीर चांपा में पहले ही कई दावेदार
इधर, जांजगीर चांपा सीट की बात करें तो यहां वर्ष 1998 में लगातार कांग्रेस के मोतीलाल देवांगन चुनाव लड़ते रहे हैं। हर बार यहां कांग्रेस से दावेदारी करने वालों संख्या अच्छी खासी रहती है, लेकिन फिर भी अब तक आंकड़ों पर गौर करें तो अंतिम दौर में मोतीलाल देवांगन टिकट लाने में कामयाब रहे हैं। इस बार पीसीसी अध्यक्ष के समक्ष कार्यकर्ताओं ने नए चेहरे की मांग करते हुए अपना पुरजोर विरोध दर्ज कराया था। अभी भी यहां से प्रमुख दावेदारों की संख्या कम नहीं है। यदि डॉ. महंत यहां से चुनाव लड़ते हैं तो क्या सभी उनके लिए काम करेंगे, बड़ा सवाल है! हालांकि जांजगीर चांपा में जिन लोग दावेदारी कर रहे हैं, वे सभी डॉ. महंत के कट्टर समर्थक माने जाते हैं। ऐसे में चुनावी दौर का अगला पड़ाव काफी दिलचस्प होने के आसार है।