छत्तीसगढ़जांजगीर-चांपा

नवरात्रि विशेषः खंभदेश्वरी के दर्शन मात्र से दूर होते हैं दुख-दर्द, नवरात्रि के तीसरे दिन शुरू हुई यहां विशेष पूजा, पहाड़ की चोटी पर बना गुफा में विराजी है मां खंभदेश्वरी

जांजगीर-चांपा। बलौदा क्षेत्र के छाता जंगल के बीच पहाड़ी पर गुफा के भीतर खंभे के रुप में विराजी खंभदेश्वरी के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था है। नवरात्रि पर्व के तीसरे दिन से यहां नवरात्रि प्रारंभ होती है। मान्यता है साक्षात रूप में विराजी माता के दर्शन मात्र से सभी दुख-दर्द दूर हो जाते हैं।

खंभदेश्वरी (खमदाई) जिला मुख्यालय से 33 किलोमीटर की दूरी पर बलौदा ब्लाक के ग्राम लेवई, नवापारा, खिसोरा और बगडबरी के बीच स्थित है। पहाड़ की चोंटी पर एक गुफा है, जिसके लगभग 10 फीट के भीतर खंभे की आकृति में देवी विराजमान है। खंभे की शक्ल में होने के चलते ही इसका नाम खमदाई पड़ा। इसका नाम बाद में खंभदेश्वरी प्रचलित हुआ। इस गुफा के बाएं और दाएं तरफ भी सुरंग हैं। दाईं ओर स्थित एक सुरंग की गहराई लगभग 10 फीट तथा दूसरे तरफ की गहराई 8 फीट है। ग्रामीणों का मानना है कि यहां साक्षात देवी विराजमान है। ऐसी मान्यता है कि आसपास के गांवों में किसी भी प्रकार की विपत्ति का पूर्वाभास खंभदेश्वरी द्वारा करा दी जाती है। पहले यहां तक पहुंचने के लिए लोगों को पहाड़ी के रास्ते से जाना पड़ता था, लेकिन 1992 में खंभदेश्वरी पर्वत गुफा आदिशक्ति पीठ समिति का गठन हुआ और चांपा के धनजी देवांगन ने यहां सीढ़ी का निर्माण कराया। खंभदेश्वरी चारों ओर से वन क्षेत्रों से घिरा है।

नवरात्रि विशेषः खंभदेश्वरी के दर्शन मात्र से दूर होते हैं दुख-दर्द, नवरात्रि के तीसरे दिन शुरू हुई यहां विशेष पूजा, पहाड़ की चोटी पर बना गुफा में विराजी है मां खंभदेश्वरी चौथा स्तंभ || Console Corptech

पहाड़ के नीचे एक पुराना कुआं है, जिसे मंदिर के पहले पुजारी गणेश राम भारद्वाज ने बनवाया था। उन्होंने पहाड़ी स्थित शिव मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। ग्रामीणों ने बताया कि यह काफी प्राचीन गुफा है और इसके संबंध में पूरी जानकारी किसी को नहीं है, फिर भी बताया जाता है कि कुछ साल पहले एक बालक गाय चराते हुए मां खंभदेश्वरी मंदिर जा पहुंचा और जिज्ञासावश वह गुफा के अंदर घुस गया। इसके बाद वह बाहर नहीं निकला। बालक के गुम होने पर ग्रामीणों ने उसकी खोजबीन शुरू की, परन्तु उसका पता नहीं चला। दो दिन बाद वह मंदिर के नीचे सुरंग से सकुशल बाहर निकला, जिसे जीवित देखकर ग्रामीण अचरज में पड़ गए। बालक ने बताया कि वह दो दिनों तक मां खंभदेश्वरी के शरण में था, जहां उसे माता ने अपने पुत्र से ज्यादा स्नेह दिया। मान्यता है कि सुरंग में घुसने वाले लोगों को माता के दर्शन होते हैं। यहां प्रतिवर्ष क्वांर व चौत्र नवरात्रि पर्व के तीसरे दिन ज्योति कलश प्रज्जवलित किए जाते हैं और पूरे नौ दिनों तक माता सेवाए जसगीत व देवी की पूजा अर्चना की जाती है।

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