छत्तीसगढ़जांजगीर-चांपा

स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी अंग्रेजी विद्यालय चांपा में आयोजित विज्ञान माडल प्रदर्शनी एवं आनंद मेले में छात्र-छात्राओं ने दिखाई अपनी प्रतिभा

0 आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए विशेष शिविर का आयोजन हुआ…

चांपा। सेजेस में आज आनंद मेला एवं विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। जिसका शुभारंभ संस्था के प्राचार्य निखिल मसीह, प्रभारी प्राचार्य रमाकांत साव ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया। शुभारंभ अवसर पर उपप्राचार्य भास्कर शर्मा, वरिष्ठ व्याख्याता आर पी मरकाम, रामचन्द्र राठौर, श्रीमती सीमा राठौर, श्रीमती रितु सिंग एवं श्रीमती निमिषा जेम्स, रविन्द्र द्विवेदी उपस्थित थे।

इस प्रदर्शनी में सेजेस विद्यालय चांपा के प्राइमरी से लेकर हायर सेकेंडरी हिंदी एवं अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों ने स्वयं के द्वारा निर्मित मॉडल को प्रदर्शित किया तथा अपनी प्रतिभा व कार्य कुशलता का प्रदर्शन किया। छात्रों द्वारा कुछ मॉडल तो इतने प्रभावित करने वाले थे कि विज्ञान प्रदर्शनी में उपस्थित अभिभावकगण, छात्रगण एवं शिक्षकगण देखते रह गए। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्रों ने हिस्सा लिया कार्यक्रम को लेकर छात्रों में अच्छा खासा उत्साह देखने को मिला। विज्ञान प्रदर्शनी में विद्यार्थियों द्वारा कई मॉडल बनाए गए थे।वहीं आनंद मेला में पारंपरिक व्यंजनों का स्टॉल लगाया गया था।आयुष्मान कार्ड बनाने हेतु विशेष काउंटर लगाया गया था। विज्ञान प्रदर्शनी के अंतर्गत छात्रों के द्वारा थर्मल पावर स्टेशन, जल शुद्धिकरण संयंत्र, चंद्रग्रहण सूर्यग्रहण पर आधारित मॉडल, सौर ऊर्जा, पवन चक्की, इमरजेंसी लाईट, श्वसन तंत्र, कंप्यूटर सीपीयू, सड़क सुरक्षा, पर्यावरण सुरक्षा आदि से संबंधित लगभग 57 मॉडल प्रदर्शित किए थे। विद्यालय के छात्र-छात्राओं के द्वारा पारंपरिक व्यंजनों का लगभग 33 स्टॉल लगाये गये थे।

जिसमें छात्र-छात्राओं के द्वारा गुपचुप, मंचूरियन, फिंगर चिप्स,सेंडविच, पाव भाजी,भेल, समोसा, भजिया, गाजर की हलुआ छत्तीसगढ़ी व्यंजन चिला चटनी, चौसेला, पुरी सब्जी, चना चटपटी के स्टाल लगाए गए थे। इसके साथ ही मोमोज, चाइनीस पकोड़ा, फिंगर चिप्स, के साथ गेम्स के भी स्टाल लगाए गए थे। रसीले एवं चटपटे व्यंजन की खुशबू से सारा कैंपस महक रहा था। बच्चों के द्वारा लगाए गए स्टाल में हर तरह के स्वादिष्ट व्यंजन रखे गए थे। सभी छात्र-छात्राएं अभिभावकगण शिक्षकगण आनंद मेले में निर्मित विभिन्न व्यंजनों का लुत्फ उठाया। कार्यक्रम को संचालित करते हुए शिक्षक रविंद्र द्विवेदी ने कहा कि सेजेस विद्यालय के बच्चे विलक्षण प्रतिभा के धनी है ।यही प्रतिभावान बच्चे आगे चलकर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देंगे। उनकी कल्पना और समझ एवं बुद्धिमत्ता से हमारा नगर, जिला, राज्य और भारत देश अवश्य उन्नति करेगा।


आयोजन अवसर पर संस्था के प्राचार्य ने कहा कि आनंद मेले एवं विज्ञान प्रदर्शनी के आयोजन से बच्चों के अंदर छुपी प्रतिभा को बाहर लाने का अवसर प्राप्त होता है, साथ ही बच्चों को स्वरोजगार संबधी नए-नए अवसरों का ज्ञान भी मिलता हैं। प्राचार्य ने स्वादिष्ट व्यंजन स्टाल व विज्ञान माडल प्रदर्शनी में भाग लेने वाले बच्चों के प्रतिभा,ज्ञान व कुशलता की सराहना की। उन्होंने सभी प्रतिभागी बच्चों को प्रमाण पत्र एवं मेडल से सम्मानित करने की घोषणा किया।

इस अवसर पर प्रभारी प्राचार्य रमाकांत साव ने कहा कि संस्था के इस आयोजन से स्पष्ट है कि विद्यालय के अधिकांश बच्चे प्रतिभावान है। उनमें बहुत प्रतिभा है। बच्चों में सीखने और कुछ करने की बहुत जिज्ञासा एवं ललक है। ऐसे आयोजन समय पर होते रहना चाहिए इस प्रकार के आयोजन से छात्राओं में सृजनशीलता, रचनात्मकता का विकास होता है। अंत में प्रभारी प्राचार्य रमाकांत साव ने बच्चों की लगन, रुचि एवं कठिन मेहनत की खूब सराहना करते हुए आनंद मिले एवं विज्ञान प्रदर्शनी आयोजन अवसर में भारी संख्या में उपस्थित अभिभावकों, छात्र छात्राओं समस्त शिक्षक शिक्षिकाओं को बहुमूल्य समय देने, सहयोग देने एवं कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त किया।

आयोजित विज्ञान माडल प्रदर्शनी एवं आनंद मेला कार्यक्रम को सफल बनाने में सचिन देव बर्मन, गोविंद नारायण शर्मा राजकुमार तंबोली, राजेश उपाध्याय, सोमनाथ पाण्डेय, मनोज बघेल, कु.धारणा साहू, श्रीमती ममता सूर्यवंशी, श्रीमती संगीता सोनी, श्रीमती रुपाली राठौर, श्रीमती शिम्मी मैडम, कु.ट्वींकल ताम्रकार, श्रीमती नीलम चंद्रा, श्रीमती सरोज देवांगन, श्रीमती वर्षा तिवारी कु. दिव्या बाजपेई, कु प्रतिभा जांगडे, कु.अंजलि यादव, अजय अग्रवाल, अविनाश राठौर, संतोष यादव, कृष्णा यादव, विजय यादव, समस्त अभिभावकगण, छात्र-छात्राओं में राजेश गोपाल, संस्कार देवांगन, दीप्ति सिंह राजपूत, श्रेया देवांगन, संजना यादव, स्नेहा यादव, प्रेम यादव, प्रियांशु पटेल, शुभम देवांगन, काजल दुबे आदि का विशेष योगदान रहा। यह जानकारी शिक्षक रविन्द्र द्विवेदी ने दी है।