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टिकट व स्टाम्प विक्रेताओं की हुई चांदी, आमजन की कट रही जेब, निर्धारित कीमत से अधिक राशि देकर स्टाम्प पेपर खरीदने की मजबूरी

जैजैपुर। आमजन पांच रूपए की टिकट को 10 रुपए में, 50 रूपए के स्टाम्प पेपर को 100 रुपए में व 100 रूपए के स्टाम्प पेपर को 150 से 200 सौ रुपए में खरीदने को मजबूर हैं तो वहीं टिकट व स्टाम्प पेपर की कालाबाजारी करने वाले मालामाल हो रहे हैं। यह खेल लंबे समय से चल रहा है, जिसकी जानकारी स्थानीय अधिकारियों को होने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। इससे टिकट व स्टाम्प पेपर विक्रेताओं के हौसले बुलंद हैं।

दरअसल, वसीयतनामा, एग्रीमेंट या कोई शपथ पत्र बनवाने के लिए लोगों को 50 और 100 रूपए के स्टाम्प पेपर की जरूरत पड़ती है और कई बार 500 रूपए के स्टाम्प पेपर की भी जरूरत होती है। वहीं भूमि और भवन की रजिस्ट्री के लिए इससे भी अधिक के स्टाम्प पेपर की जरूरत पड़ती है, लेकिन टिकट और स्टाम्प पेपर की कालाबाजारी के कारण आमजनों की जेब कट रही है तो वहीं टिकट, स्टाम्प और ई-स्टाम्प पेपर बेचने वाले चांदी काट रहे हैं। विदित हो कि तहसील कार्यालय व उप पंजीयक कार्यालय के पास लम्बे समय से टिकट और स्टाम्प पेपर की कालाबाजारी चल रही है, जिसकी जानकारी उप पंजीयक को होने के बाद भी कार्यवाही नहीं करना समझ से परे है। वहीं स्टाम्प के लिए तय दर से अधिक लेने की अनेक बार शिकायत एवं खबर छपने के बाद भी उप पंजीयक द्वारा किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं करना उनके कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हैं। कार्यालय उप-पंजीयक जैजैपुर में अधिक दर पर वेंडरों द्वारा बेचा जाना कई प्रकार के संदेहों को जन्म दे रहा है।

अनेक वेंडरों के पास लाइसेंस नहीं

उप पंजीयक जैजैपुर अंतर्गत कई स्टाम्प वेंडरों के पास वैध लाइसेंस भी नही है। उप पंजीयक कार्यालय के कर्मचारी की मानें तो कई वेंडरों के पास टिकट एवं स्टांप बेचने का लाइसेंस नहीं है, उसके बाद भी बेच रहे हैं। तहसील कार्यालय और उप पंजीयक कार्यालय के पास बैठने वाले वेंडर और तहसील कार्यालय के पास संचालित फोटो कापी दुकान संचालक के पास भी लाइसेंस नहीं है, बावजूद इसके टिकट और स्टाम्प पेपर को तय कीमत से दुगुना दर पर उनके द्वारा बेचा जा रहा है, जो कि नियम विरुद्ध है। ऐसे वेंडरों के खिलाफ कार्यवाही करना चाहिए, लेकिन उप पंजीयक संत राम साहू द्वारा किसी पर कार्यवाही नहीं किए जाने से अवैध टिकट और स्टाम्प पेपर बेचने वाले को कोई डर नहीं है। वहीं क्षेत्र के ग्रामीणों को दुगुना रकम देकर स्टाम्प व टिकट लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उप पंजीयक को जानकारी होने के बावजूद भी कार्रवाई न करना उनके कार्यशैली पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।कहीं उनके द्वारा कमीशन लेकर टिकिट व स्टाम्प विक्रेताओं को खुली छूट थोड़ी दे रखे हैं?


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