अन्न, हरियाली और समृद्धि का प्रतीक है भोजली: रावटे

बहेराडीह में आयोजित भोजली महोत्सव में कोरबा जिले की महिला सरपंच कविता मरावी को मिला प्रथम पुरस्कार
जांजगीर चांपा। भोजली एक लोक एवं क़ृषि आधारित पर्व है, जिसमें हरियाली अंकुरित अनाज को उगाकर उसकी पूजा की जाती है और जल में विसर्जन किया जाता है. भोजली को अन्न, हरियाली और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
उक्त विचार बहेराडीह में स्थित देश के पहले वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल में आयोजित भोजली महोत्सव का शुभारम्भ करते हुए जिला पंचायत के सीईओ गोकुल रावटे ने व्यक्त किया. क़ृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक व प्रमुख डॉ के डी महंत ने कहा कि भोजली पर्व मुख्य रूप से अन्न, हरियाली और खुशहाली की कामना के लिए मनाई जाती है।
इसके पीछे कई मान्यताएं जैसे अच्छी फ़सल की प्रार्थना, वर्षा और उपजाऊ धरती का आभार, सामूहिक एकता और सामाजिक मेल जोल, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को संजोना, आदि शामिल है. महोत्सव में शामिल समाजसेवी डॉ. सुरेश कुमार देवांगन ने भोजली को प्रकृति और क़ृषि के प्रति आभार तथा आने वाली फ़सल की समृद्धि की प्रार्थना कर सामाजिक एकता का उत्सव बताया।

प्रगतिशील किसान व सिवनी के जनपद सदस्य चुड़ामणि राठौर ने भोजली पर्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भो अर्थात धरती और जली का तात्पर्य जल से है, जिसे भोजली को धरती और जल का मिलन का प्रतीक माना जाता है, जिसे महिलाएं श्रवण मास के शुक्ल पक्ष में एक पात्र में मिट्टी, राख और बालू डालकर उसमें गेहूं या जौ के बीज बोती हैं. इन अंकुरित पौधों को भोजली कहा जाता है, जिन्हें नौ दिनों तक पानी देकर उनकी सेवा किया जाता है और भाद्र कृष्ण पक्ष की अंतिम में तालाब में विसर्जन किया जाता है।
बलौदा जनपद के पूर्व उपाध्यक्ष नम्रता राघवेंद्र नामदेव ने कहा कि महिलाएं भोजली गीत फ़सल की अच्छी पैदावार और गांव घर में खुशियाली की कामना के लिए गाया जाता है. समाजसेवी अजय अग्रवाल ने कहा, भोजली का पर्व अन्न को धारण करने वाली पूजा है. जिला पंचायत बिहान के डीएमएम उपेंद्र कुमार दुबे ने भोजली को धरती माता की उर्वरता, वर्षा और नई फ़सल की कामना का प्रतीक बताया, वहीं किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने भोजली को प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और आने वाले क़ृषि चक्र की तैयारी का संकेत बताया तो ग्रामीण स्व रोजगार प्रशिक्षण संस्थान जांजगीर के फेकेल्टी उत्तम कुमार राठौर व किशन निर्मलकर ने भोजली को सामूहिकता, भाईचारे और महिला भागीदारी को बढ़ावा देने वाला पर्व बताया।
सरपंच चन्दा सरवन कश्यप ने महिलाओ को भोजली पर्व को प्रतिवर्ष धूमधाम से मनाये जाने में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया है. भोजली का विषर्जन गाजे बाजे और आतिशबाजी के साथ किया किया. इस दौरान महिलाओं ने भोजली को सिर पर रखकर नृत्य किया और भोजली गीत गाया.

भोजली महोत्सव में यें रहीं विजेता
भोजली महोत्सव में प्रथम पुरस्कार जिला पंचायत सदस्य उमा राजेंद्र राठौर के सौजन्य से कोरबा जिला अंतर्गत सुखरीखुर्द की महिला सरपंच कविता मरावी को 1500 रूपये और प्रमाण पत्र प्रदान किया गया. दूसरा पुरस्कार बलौदा जनपद के पूर्व उपाध्यक्ष नम्रता राघवेंद्र नामदेव द्वारा 1000 रूपये और प्रमाण पत्र परमेश्वरी यादव को दी गईं. तीसरा पुरुष्कार जनपद सदस्य नमिश कश्यप द्वारा गंगा यादव को 800 रूपये व प्रमाण पत्र दी गईं. चौथा पुरुष्कार सरपंच चंदा सरवन कश्यप द्वारा अनुसुइय्या यादव को 700 रूपये व प्रमाण पत्र दी गईं. पांचवा पुरुष्कार डॉ. रामदयाल यादव के द्वारा टिकैतीन कश्यप को 500 रूपये और प्रमाण पत्र दी गईं. इसी तरह कमलेश्वरी कश्यप, खुशबु यादव को क़ृषि विज्ञान केंद्र जांजगीर के वरिष्ठ वैज्ञानिक व प्रमुख खेमादास महंत ने पांच, पांच सौ रूपये, केंद्रीय रेशम बोर्ड के सलाहकार रामाधार देवांगन ने 100 रूपये, पंच ललित कंवर ने 51 रूपये सरपंच चंदा सरवन कश्यप ने 10 महिलाओ को पर्स और अन्य 21 महिलाओ तथा युवतियाँ को सांत्वना पुरुष्कार से सम्मानित किया गया. महोत्सव को सफल बनाने में बिहान की क्रेडर्स रेवती यादव, ललिता यादव, सुमित्रा यादव, साधना यादव, पुष्पा यादव, दीप्ती झरना कश्यप, शकुन यादव और स्थानीय जनप्रतिनिधि का सराहनीय योगदान रहा.
