जब इंसानियत बनी पहचान: महेश राठौर और तरणीश साहू को मिला ‘छत्तीसगढ़ रत्न सम्मान’, रक्त की हर बूंद से लिख रहे हैं जिंदगी की नई कहानी
जांजगीर-चांपा।
किसी के जीवन में खुशियां लौटाना, किसी मां की सूनी होती गोद बचा लेना, किसी बच्चे की धड़कनों को फिर से गति देना और किसी परिवार की उम्मीदों को टूटने से बचा लेना—शायद यही सच्ची मानव सेवा है। इसी सेवा को अपना जीवन उद्देश्य बनाने वाले रक्तदाता क्रांति समूह के संस्थापक महेश कुमार राठौर एवं तरणीश साहू (AB नेगेटिव) को उनकी अतुलनीय समाजसेवा के लिए “छत्तीसगढ़ रत्न सम्मान” से अलंकृत किया गया।
हेल्पिंग हैंड्स क्लब फाउंडेशन छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित रक्तदान का महाकुंभ, छत्तीसगढ़ रत्न सम्मान समारोह एवं जिला कार्यकारिणी शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री एवं सांसद तोखन साहू ने दोनों समाजसेवियों को सम्मानित किया। यह सम्मान उन नौ वर्षों की निस्वार्थ सेवा का परिणाम है, जिसमें उन्होंने हजारों जरूरतमंद मरीजों तक समय पर रक्त पहुंचाकर अनगिनत जिंदगियों को नया जीवन दिया।
महेश कुमार राठौर ने बताया कि उनका संकल्प केवल रक्तदान तक सीमित नहीं है। उनका सपना है कि “जीते-जी रक्तदान और जाते-जाते नेत्र व देहदान” की सोच हर घर तक पहुंचे। सिकल सेल, थैलेसीमिया और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे गरीब मरीजों के लिए उनकी टीम दिन-रात रक्त उपलब्ध कराने में जुटी रहती है। कई बार आधी रात को भी सिर्फ एक फोन कॉल पर रक्तदाता अस्पताल पहुंच जाते हैं और किसी अनजान व्यक्ति की जिंदगी बचा लेते हैं।
सम्मान समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि “जो लोग अपने शरीर का रक्त देकर किसी जरूरतमंद की जान बचाते हैं, वे केवल सेवा नहीं, बल्कि सच्ची देशभक्ति का परिचय देते हैं। एक यूनिट रक्तदान से तीन मरीजों को नया जीवन मिल सकता है। हमारा लक्ष्य है कि हर घर से एक रक्तदाता तैयार हो और रक्तदान की संस्कृति पूरे समाज में मजबूत हो।”
महेश राठौर और तरणीश साहू को मिले इस सम्मान पर अशोक तिवारी, चन्द्रकुमार राठौर, रिंकू अग्रवाल, मयंक शुक्ला, प्रफुल पाण्डेय, नीलमणी गुरुदिवान, दीपक यादव, जितेन्द्र देवांगन, मनीष राठौर, सीमा राठौर, ज्योति श्रीवास, अमर महंत, लोमश बरेठ, नरेन्द्र साहू, स्पेंद्र मिरी, खुशवंत खांडे, अरविन्द कुमार सारथी, भुनेश्वर पटेल, संतोष साहू, रामनाथ साहू सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि उन सभी रक्तदाताओं का सम्मान है जो मानवता की सेवा को अपना धर्म मानते हैं।
वास्तव में, जब इंसान अपने खून की एक बूंद किसी अनजान की जिंदगी बचाने के लिए देता है, तब वह केवल रक्तदान नहीं करता, बल्कि उम्मीद, विश्वास और जीवन का सबसे अनमोल उपहार देता है।
