छत्तीसगढ़जांजगीर-चांपाराजनीति

कांग्रेस के कलेक्टोरेट घेराव के बाद भाजपा का पलटवार, प्रेसवार्ता में बोले नेता “चुनाव आयोग के संयुक्त बयान से कांग्रेस के आरोपों पर उठे सवाल”

जांजगीर-चांपा। कांग्रेस द्वारा चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर किए गए कलेक्टोरेट घेराव के अगले दिन जांजगीर-चांपा में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने आज जिला भाजपा कार्यालय जांजगीर में प्रेसवार्ता आयोजित कर कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया। प्रेसवार्ता में जिला भाजपा अध्यक्ष अंबेश जांगड़े, जिला महामंत्री नंदनी रजवाड़े, नगरपालिका अध्यक्ष रेखा गढ़ेवाल सहित पार्टी के पदाधिकारी मौजूद रहे।

भाजपा नेताओं ने चुनाव आयोग की 26 सितंबर को हुई बैठक और उसके बाद जारी संयुक्त प्रेस वक्तव्य का हवाला देते हुए कहा कि आयोग ने SIR समेत विभिन्न मुद्दों पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। चुनाव आयोग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार 26 सितंबर की बैठक में लिए गए निर्णयों को पूरे आयोग की स्वीकृति प्राप्त थी।

कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद भाजपा ने की प्रेसवार्ता

गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले जिला कांग्रेस कमेटी ने राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में कलेक्टोरेट का घेराव किया था। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पुतला दहन किया और निर्वाचन प्रक्रिया तथा SIR को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।

कांग्रेस ने प्रदर्शन के दौरान चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ज्ञापन भी सौंपा था। इसके बाद भाजपा ने जिला कार्यालय में प्रेसवार्ता कर कांग्रेस के आरोपों पर अपना पक्ष रखा।

“SIR के फैसले सर्वसम्मति से हुए”

भाजपा नेताओं ने कहा कि चुनाव आयोग के संयुक्त बयान में स्पष्ट किया गया है कि Special Intensive Revision (SIR) से जुड़े निर्णयों को लेकर आयोग के तीनों सदस्यों की सहमति थी। आयोग के अनुसार 24 जून 2025 के मूल आदेश और अलग-अलग राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया से जुड़े निर्णय आयोग की पूर्ण सहमति से लिए गए।

भाजपा ने इसी स्पष्टीकरण को आधार बनाते हुए कांग्रेस द्वारा आयोग के भीतर मतभेद के लगाए गए आरोपों पर सवाल उठाए। पार्टी नेताओं ने कहा कि निर्वाचन आयोग के आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद अब कांग्रेस को अपने आरोपों का आधार स्पष्ट करना चाहिए।

कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखे पत्र पर भी भाजपा ने उठाया सवाल

प्रेसवार्ता में कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखे गए पत्र का मुद्दा भी उठाया गया। भाजपा नेताओं ने कहा कि जिस पत्र को लेकर आयोग के भीतर कथित मतभेद की बात कही जा रही थी, चुनाव आयोग ने उसे SIR या किसी नीतिगत निर्णय से जुड़ा हुआ नहीं बताया है।

आयोग के स्पष्टीकरण के अनुसार यह मामला प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी की प्रशासनिक कार्यप्रणाली से संबंधित था। भाजपा ने कहा कि इस स्पष्टीकरण के बाद इस पत्र को SIR से जोड़कर देखने पर सवाल खड़े होते हैं।

Form-6 को लेकर भी भाजपा ने रखा पक्ष

भाजपा नेताओं ने Form-6 को लेकर भी कांग्रेस के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि SIR के दौरान मतदाताओं से संबंधित प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

चुनाव आयोग के आधिकारिक बयान में SIR के दौरान नोटिस प्राप्त लोगों के दस्तावेज BLO द्वारा घर से एकत्र करने और उन्हें ECI-Net पर अपलोड किए जाने की व्यवस्था की जानकारी भी दी गई है। आयोग ने कहा है कि ऐसे मामलों में संबंधित लोगों को दस्तावेज जमा करने के लिए ERO/AERO कार्यालय बुलाने की जरूरत नहीं होगी।

सत्यलता मिरी ने कांग्रेस के आरोपों पर साधा निशाना

प्रेसवार्ता के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष सत्यलता मिरी ने कांग्रेस के आंदोलन और उसके दौरान लगाए गए चुनाव आयोग संबंधी आरोपों पर सवाल उठाए। उन्होंने चुनाव आयोग के संयुक्त बयान का हवाला देते हुए कहा कि जब आयोग स्वयं अपने निर्णयों और प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट कर चुका है, तो कांग्रेस को तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते समय राजनीतिक दलों को ठोस तथ्यों और प्रमाणों के साथ अपनी बात जनता के सामने रखनी चाहिए।

कांग्रेस-भाजपा के आमने-सामने आने से गरमाई सियासत

कांग्रेस के कलेक्टोरेट घेराव और उसके अगले दिन भाजपा की प्रेसवार्ता के बाद जांजगीर-चांपा में चुनाव आयोग और SIR का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस जहां निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा चुनाव आयोग के संयुक्त बयान को आधार बनाकर कांग्रेस के आरोपों पर जवाब मांग रही है। अब दोनों प्रमुख दलों के आमने-सामने आने से यह मुद्दा जिले की सियासत में आगे भी चर्चा का विषय बना रहने की संभावना है।

Leave a Reply