पाठ्यपुस्तक संकट पर बवाल: 25 जून को प्रदेशभर के अशासकीय विद्यालय बंद करने की घोषणा

जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ ने राज्य में समय पर पाठ्यपुस्तकों का वितरण नहीं होने पर सरकार और पाठ्यपुस्तक निगम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ राज्य पाठ्यपुस्तक निगम की लापरवाही और अव्यवस्थित वितरण व्यवस्था के कारण लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
संघ के अध्यक्ष मनोज पाण्डेय और सचिव आलोक शुक्ला द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि राज्य शासन वर्षों से शासकीय विद्यालयों को संकुल स्तर पर और अशासकीय विद्यालयों को जिला स्तर पर समय पर निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराता रहा है, लेकिन पिछले दो वर्षों से स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
संघ का आरोप है कि वर्ष 2025-26 में कई विद्यालयों को सितंबर माह तक भी पूरी किताबें नहीं मिल पाई थीं, जबकि कुछ विषयों की पुस्तकें पूरे शैक्षणिक सत्र में उपलब्ध नहीं हो सकीं। इसके बावजूद पाठ्यपुस्तक निगम ने अपनी व्यवस्था में कोई सुधार नहीं किया।
ज्ञापन में कहा गया है कि पिछले वर्ष निगम ने पुरानी व्यवस्था बदलकर पुस्तकों के वितरण के लिए छह डिपो निर्धारित किए थे, जिससे विद्यालयों को आधी-अधूरी किताबें बड़ी मुश्किल से मिल सकीं। वहीं बारकोड स्कैनिंग की नई व्यवस्था के कारण पुस्तकें मिलने के बाद भी विद्यार्थियों तक पहुंचाने में अतिरिक्त समय लगा और पढ़ाई प्रभावित हुई।
संघ का कहना है कि पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष और अधिकारियों के साथ कई दौर की चर्चा के बाद आश्वासन दिया गया था कि सत्र 2026-27 से व्यवस्था में सुधार होगा तथा अशासकीय विद्यालयों को भी संकुल स्तर पर पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। लेकिन नए सत्र में भी हालात जस के तस बने हुए हैं।
संघ के अनुसार नया शैक्षणिक सत्र 16 जून से शुरू हो चुका है और बोर्ड परीक्षाएं फरवरी माह में प्रस्तावित हैं, लेकिन अब तक अधिकांश विद्यार्थियों को पूरी पाठ्यपुस्तकें नहीं मिल सकी हैं। इतना ही नहीं, अशासकीय विद्यालयों को 21 जुलाई तक पुस्तकों के वितरण की योजना बनाई गई है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित होगी।
संचालक संघ ने इसे विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए पाठ्यपुस्तक निगम के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही अशासकीय विद्यालयों को भी संकुल स्तर पर पुस्तकों का वितरण सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो 25 जून को प्रदेश के सभी अशासकीय विद्यालयों में शिक्षण कार्य बंद कर जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद भी यदि 5 जुलाई तक संकुल स्तर पर पुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो प्रदेशभर के निजी विद्यालय संचालक, शिक्षक और पालक राजधानी रायपुर में व्यापक आंदोलन करेंगे।
संघ ने कहा कि यह लड़ाई किसी संस्था की नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य की है और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।