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नौकरी नहीं तो शादी नहीं! शासन-प्रशासन की लापरवाही से कुंवारी घर में बैठी छ्ह बेटियां 

0 प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण के बाद भी 11 सालों से दफ्तरों की खाक छान रहा किसान, परिवार के साथ मांगी इच्छामृत्यु
 

जांजगीर-चांपा। पास के गांव सरखों निवासी एक किसान से मड़वा पावर प्लांट स्थापना के लिए जमीन तो ली, लेकिन 11 साल बाद भी परिवार के किसी भी सदस्य को नौकरी नहीं दी। इस वजह से उनकी बेटियों की शादी नहीं हो रही है। क्योंकि शादी हो जाने के बाद नौकरी की उम्मीद भी खत्म हो जाएगी। इसलिए उनकी 6 बेटियां बिन ब्याही घर में बैठी हैं। किसान बीते 11 सालों से न्याय की गुहार लगाते शासन प्रशासन का चक्कर काट रहा है, लेकिन उसकी सुनने वाला कोई नहीं है।
 

आवेदक रामसनेही राठौर ने प्रशासन को दिए अपने आवेदन में कहा है कि उसकी पारिवारिक भूमि का अधिग्रहण मड़वा पावर प्लांट स्थापना के लिए किया गया। प्रबंधन ने मुआवजा तो दिया, लेकिन वर्षों बाद भी परिवार के किसी सदस्य को रोजगार नहीं मिली। नौकरी के अभाव में उनकी बेटियों की शादी नहीं हो रही है। क्योंकि शादी हो जाने के बाद नौकरी की उम्मीद भी खत्म हो जाएगी। उसकी 6 बेटियां नौकरी की आस में पलके बिछाए बैठी है।

आवेदन में रामसनेही राठौर ने उल्लेख किया है कि उनके पिता रामलाल राठौर के नाम दर्ज भूमि के विभिन्न खसरों का अधिग्रहण अलग-अलग वर्षों में किया गया था। वर्ष 2011, 2015 और 2020 में अधिग्रहित भूमि के एवज में मुआवजा प्रदान किया गया, लेकिन रोजगार के मामले में उनके परिवार को लगातार नजरअंदाज किया गया। उसका कहना है कि मड़वा पावर प्लांट द्वारा गांव के अनेक लोगों को नौकरी दी गई है, जबकि उनका परिवार भी भूमि प्रभावित होने के बावजूद रोजगार से वंचित है। 

उन्होंने बताया कि कई बार आवश्यक दस्तावेज और आईटीआई से संबंधित प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के बाद भी उन्हें नौकरी नहीं दी गई। आवेदन में उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि जब वे रोजगार की मांग करते हैं तो उन्हें यह कहकर टाल दिया जाता है कि भूमि अधिग्रहण के एवज में मुआवजा दिया जा चुका है, इसलिए नौकरी के पात्र नहीं हैं। जबकि अन्य प्रभावित परिवारों को रोजगार दिए जाने की जानकारी उन्हें मिली है।
 

उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि भूमि अधिग्रहण के एवज में उनके तीन खातों के अनुसार परिवार के तीन सदस्यों को रोजगार प्रदान किया जाए। आवेदन के अनुसार संबंधित खातों के लिए आईटीआई नामांकन और अन्य आवश्यक दस्तावेज पहले ही जमा किए जा चुके हैं। आवेदक ने कलेक्टर से भावुक अपील करते हुए कहा है कि यदि उन्हें और उनके परिवार को रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो उन्हें “खुदकुशी करने की अनुमति” प्रदान की जाए।

 उन्होंने इसे अपनी मजबूरी बताते हुए कहा कि अब उनके सामने जीवन यापन का कोई अन्य साधन नहीं बचा है। आवेदन के साथ आवेदक ने भूमि मुआवजा संबंधी दस्तावेज, एफआईआर की प्रति, पंचनामा फॉर्म, नामांकन फॉर्म तथा वर्ष 2000 से जून 2026 तक राखड़ (फ्लाई ऐश) से हुए नुकसान संबंधी दस्तावेज भी संलग्न किए हैं।

मामला अब जिला प्रशासन के संज्ञान में पहुंच गया है। आवेदन में लगाए गए आरोपों और रोजगार संबंधी मांगों पर प्रशासन तथा मड़वा पावर प्लांट प्रबंधन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर क्षेत्रवासियों की नजरें टिकी हुई हैं।

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