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पाठ्यपुस्तकों में देरी के विरोध में निजी स्कूल संचालकों का प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ के आह्वान पर गुरुवार को जांजगीर-चांपा जिला मुख्यालय में निजी स्कूल संचालकों ने पाठ्यपुस्तकों के वितरण में हो रही देरी के विरोध में धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते हुए शीघ्र समाधान की मांग की गई।

संघ के जिला अध्यक्ष एवं प्रदेश सचिव मनोज पाण्डेय ने बताया कि 22 जून को कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी गई थी कि यदि 24 जून तक निजी विद्यालयों को संकुल स्तर पर निशुल्क पाठ्यपुस्तक उपलब्ध कराने का लिखित आदेश जारी नहीं किया गया, तो पूरे प्रदेश के जिला मुख्यालयों में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। मांग पूरी नहीं होने पर आज प्रदेशभर में आंदोलन किया गया।

संघ का आरोप है कि छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा निजी विद्यालयों के विद्यार्थियों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। अभी तक निजी विद्यालयों को जिला मुख्यालय पर भी पुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। निगम ने केवल छह डिपो से पुस्तकों के वितरण की व्यवस्था बनाई है। जांजगीर-चांपा जिले के विद्यालयों को 21 जुलाई को बिलासपुर से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित डिपो से पुस्तकें लेने के लिए बुलाया गया है, जिससे स्कूल संचालकों को अतिरिक्त आर्थिक और समय की परेशानी होगी।

संघ ने बताया कि पिछले वर्ष रायपुर में हुए आंदोलन के बाद शासन ने निजी विद्यालयों को भी पुस्तकों की स्कैनिंग की अनुमति दी थी और मौखिक रूप से आश्वासन दिया गया था कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से निजी विद्यालयों को भी संकुल स्तर पर पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके बावजूद इस वर्ष भी व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ।

संघ ने यह भी कहा कि समस्या केवल निजी विद्यालयों तक सीमित नहीं है। शासकीय विद्यालयों में भी 10 जून से पुस्तकों का वितरण शुरू होने के बावजूद अधिकांश स्कूलों में सभी विषयों की पुस्तकें नहीं पहुंची हैं। 25 जून तक बारकोड स्कैनिंग पूरी नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को पुस्तकें वितरित नहीं की जा सकी हैं। वहीं आत्मानंद विद्यालयों में कक्षा 9वीं और 10वीं की पुस्तकें भी अब तक नहीं पहुंची हैं।

संघ की प्रमुख मांग है कि प्रत्येक वर्ष विद्यालय प्रवेश उत्सव (16 जून) से कम से कम एक माह पहले सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों को पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही पुस्तकों में बारकोड व्यवस्था समाप्त की जाए, क्योंकि यह शिक्षकों पर अविश्वास दर्शाने के साथ उनका अपमान भी है।

जांजगीर-चांपा जिले में संचालित 453 निजी विद्यालयों के अधिकांश संचालक एवं शिक्षक धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे तहसीलदार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। तहसीलदार ने ज्ञापन शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।

धरना-प्रदर्शन में मनोज पाण्डेय के साथ आलोक शुक्ला, रोशन केशरवानी, नरेंद्र पांडेय, धनेश मिश्रा, प्रतीक गुप्ता, रवि निर्मलकर, धनंजय दिव्य, जितेंद्र सोनी, रवि शंकर चौबे, डी.आर. कश्यप, अखिलेश सेंगर, गणेशराम पटेल, सुरेश कुमार, किशोर सिंह, आलोक नाग, अखिलेश कटकवार, सुरेश यादव, आर.पी. यादव, जगदीश बंजारे, घनश्याम जलतारे, अभय पांडेय, रजीन दास मानिकपुरी, महादेव टंडन, लक्ष्मी कश्यप, लीलाधर साहू, आर.के. साहू, राजेश पाण्डेय, शशांक जैन, कमलेश राठौर, शिवप्रसाद कश्यप और जवाहर कश्यप सहित बड़ी संख्या में निजी विद्यालय संचालक एवं शिक्षक उपस्थित रहे।

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