
0 रसूखदार लोगों की मिलीभगत से पूरे प्रदेश में अरबों के घोटाले की संभावना
छत्तीसगढ़। प्रदेश में इन दिनों संग्रहण केंद्रों में रखे करोड़ों रुपये के धान को चूहों के खा जाने की खबरें सुर्खियों में हैं। इस मुद्दे पर सियासत गरमा गई है तो वहीं विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है, तो सत्ता पक्ष बचाव में जुटा है। लेकिन इस पूरे मामले में अब एक नया मोड़ सामने आ रहा है।
चौथा स्तंभ न्यूज की पड़ताल में मिले कुछ अहम दस्तावेज संकेत दे रहे हैं कि यह मामला सिर्फ चूहों तक सीमित नहीं, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा संगठित खेल हो सकता है। शुरुआती हमारी पड़ताल में यह बात सामने आई है कि धान के इस पूरे खेल में गड़बड़ी की आशंका है, जिसका कनेक्शन कृषि उपज मंडी समितियों से लेकर संग्रहण केंद्रों तक जुड़ा हुआ दिख रहा है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दस्तावेजों में कई ऐसे नाम सामने आए हैं, जो पेशे से उद्योगपति हैं, लेकिन रिकॉर्ड में बड़े किसानों के रूप में लाखों रुपए के धान विक्रय करना दर्ज हैं। दस्तावेजों के मुताबिक, इनमें से कुछ ने एक ही दिन में 50 लाख रुपये से अधिक का धान बेचकर नगद भुगतान प्राप्त करने का उल्लेख किया है, जो पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है।
फिलहाल चौथा स्तंभ न्यूज इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है। बहुत जल्द इस “धान घोटाले” से जुड़े और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं, जो प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों को हिला सकते हैं।