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46 डिग्री की तपिश में उबल रहा चांपा: बिजली संकट बना जनता के गुस्से का सबसे बड़ा कारण

चांपा शहर इन दिनों भीषण गर्मी ही नहीं, बल्कि बदहाल बिजली व्यवस्था की मार भी झेल रहा है। 46 डिग्री तापमान में जब इंसान का शरीर आग की तरह तप रहा हो, ऐसे वक्त घंटों बिजली गुल होना लोगों के सब्र का बांध तोड़ने लगा है। शनिवार की शाम से लेकर देर रात तक शहर के कई हिस्सों में अंधेरा पसरा रहा। पंखे थम गए, कूलर शांत हो गए, एसी बेअसर हो गए और लोग उमस भरी रात में छटपटाते रहे। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई बिजली विभाग और प्रशासन की लापरवाही को कोसता नजर आया।

चांपा की बिजली समस्या अब सिर्फ तकनीकी खराबी या सामान्य परेशानी नहीं रह गई है, बल्कि यह शहर का सबसे ज्वलंत और विस्फोटक मुद्दा बन चुका है। शहरवासियों का कहना है कि आए दिन घंटों बिजली गुल रहना अब आम बात हो गई है। लोग दिन में तपती धूप और रात में उमस भरी बेचैनी झेलने मजबूर हैं। हालात इतने खराब हैं कि कई मोहल्लों में पानी की समस्या भी बढ़ने लगी है, क्योंकि बिजली नहीं रहने से मोटर और पंप बंद हो जाते हैं।

बताया जा रहा है कि चांपा में नए सब स्टेशन के लिए भू-आवंटन की फाइल लंबे समय से नगर पालिका और राजस्व विभाग के पेंच में उलझी हुई है। फाइलों की इस सरकारी खींचतान का सीधा खामियाजा आम जनता भुगत रही है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जनता कब तक अधिकारियों की सुस्ती और विभागीय उदासीनता का शिकार बनती रहेगी? जब तापमान 46 डिग्री पार हो चुका है, तब भी जिम्मेदार विभागों के बीच तालमेल नहीं बन पाना प्रशासनिक विफलता की बड़ी तस्वीर पेश करता है।

शहर में बिजली संकट को लेकर लोगों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। सोशल मीडिया से लेकर चौक-चौराहों तक हर जगह इसी मुद्दे की चर्चा हो रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाले जिम्मेदार जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या पर चुप क्यों हैं? जनता को राहत दिलाने के लिए कोई ठोस योजना आखिर क्यों नहीं दिखाई दे रही?

इधर, इस गंभीर समस्या को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार कांग्रेस के एक कार्यकर्ता ने मुख्यमंत्री को फोन कर चांपा की बिजली समस्या से अवगत कराया। इसके कुछ समय बाद कांग्रेस जिलाध्यक्ष के भाई ने भी मुख्यमंत्री से चर्चा कर शहर की बदहाल स्थिति बताई। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा राजनीतिक सवाल खड़ा कर दिया है, जब जनता बिजली संकट से त्रस्त है, तब विपक्ष के विधायक आखिर क्यों खामोश हैं? लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि वरिष्ठ भाजपा नेता व पूर्व विधायक भी इस गंभीर मुद्दे पर जनता को राहत दिलाने के लिए कोई मजबूत पहल करते नजर नहीं आ रहे।

कांग्रेस पार्टी राज्य और राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर अक्सर सड़क पर आंदोलन करती दिखाई देती है। महंगाई, बेरोजगारी और अन्य राष्ट्रीय विषयों पर धरना-प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस अब चांपा शहर की इस विकराल बिजली समस्या को लेकर सड़क की लड़ाई लड़ने से आखिर क्यों पीछे हट रही है? शहरवासियों के मन में यह सवाल लगातार गूंज रहा है कि क्या स्थानीय समस्याएं राजनीतिक प्राथमिकताओं से बाहर हो चुकी हैं?

इसके विपरीत सत्ता पक्ष के नगर पालिका अध्यक्ष ने सड़क पर उतरकर बिजली संकट को लेकर आवाज बुलंद की। उन्होंने लोगों की परेशानियों को गंभीर बताते हुए जल्द समाधान की मांग की। इससे राजनीतिक माहौल और ज्यादा गर्म हो गया है। अब जनता यह देखने लगी है कि कौन नेता सिर्फ बयानबाजी कर रहा है और कौन वास्तव में लोगों की पीड़ा के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है।

फिलहाल, चांपा की जनता भीषण गर्मी और बिजली कटौती की दोहरी मार झेल रही है। हर गुजरते दिन के साथ लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। यदि जल्द ठोस समाधान नहीं निकला, तो यह समस्या आने वाले दिनों में बड़े जनआक्रोश का रूप ले सकती है। क्योंकि 46 डिग्री की आग उगलती गर्मी में जनता सिर्फ बिजली नहीं, बल्कि राहत, जिम्मेदारी और जवाबदेही भी मांग रही है।

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