छत्तीसगढ़जांजगीर-चांपा

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर न घबराएं, थोड़ी सी सावधानी से बच सकती है बड़ी आर्थिक हानि

परसाडीह के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में साइबर अपराधों से बचाव को लेकर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित, 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करने की दी गई जानकारी

जांजगीर-चांपा। वर्तमान समय में बढ़ते साइबर अपराधों और ऑनलाइन ठगी के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से 8 अक्टूबर 2026 को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परसाडीह में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देशों तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जांजगीर-चांपा के मार्गदर्शन में आयोजित शिविर में साइबर अपराध पीड़ितों की सहायता और धोखाधड़ी से ठगी गई राशि की रिकवरी से संबंधित योजना, 2026 के बारे में जानकारी दी गई।

शिविर में अधिकार मित्र लक्ष्मी प्रसाद जायसवाल ने उपस्थित लोगों को साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों से अवगत कराते हुए कहा कि साइबर अपराधी नए-नए हथकंडे अपनाकर लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल अरेस्ट के नाम से बिल्कुल न घबराएं। थोड़ी सी सावधानी आपको बड़ी आर्थिक और मानसिक हानि से बचा सकती है।

उन्होंने बताया कि साइबर ठग फिशिंग और स्पूफिंग के जरिए बैंक, सरकारी विभाग या प्रतिष्ठित कंपनियों का अधिकारी बनकर फर्जी ईमेल, मैसेज और फोन कॉल करते हैं। इसके बाद संदिग्ध लिंक पर क्लिक करवाकर या गोपनीय जानकारी हासिल कर बैंक खाते से रकम निकाल लेते हैं। उन्होंने किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी साझा नहीं करने और नौकरी या लॉटरी के नाम पर मिलने वाले लालच से बचने की सलाह दी।

लक्ष्मी प्रसाद जायसवाल ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठग स्वयं को पुलिस, सीबीआई या अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर मनी लॉन्ड्रिंग अथवा ड्रग्स जैसे झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देते हैं और पैसे की मांग करते हैं। ऐसी धमकियों से घबराने के बजाय सतर्क रहने और किसी के दबाव में आकर पैसे नहीं भेजने की जरूरत है। उन्होंने फर्जी कस्टमर केयर नंबर, अनजान ऐप, एपीके फाइल, रिमोट एक्सेस ऐप, फर्जी निवेश योजनाओं और सिम कार्ड से जुड़ी धोखाधड़ी के प्रति भी सचेत किया। साथ ही क्रेडिट और डेबिट कार्ड का सावधानीपूर्वक उपयोग करने तथा पासवर्ड, पिन जैसी संवेदनशील जानकारी किसी से साझा नहीं करने की अपील की।

अधिकार मित्र भगवती भारद्वाज ने साइबर फ्रॉड से बचाव के उपाय बताते हुए कहा कि किसी भी संदिग्ध लिंक, ईमेल या मैसेज पर क्लिक न करें। सभी खातों के लिए अलग-अलग और मजबूत पासवर्ड रखें तथा जहां संभव हो, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करें। मोबाइल का सॉफ्टवेयर नियमित रूप से अपडेट करें और ऐप केवल आधिकारिक प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें। सार्वजनिक वाई-फाई का उपयोग करते समय बैंकिंग या अन्य संवेदनशील लेनदेन करने से बचें।

उन्होंने कहा कि कम समय में अधिक मुनाफा देने वाली योजनाओं, अचानक धनवान बनाने के वादों और बड़े इनाम का लालच देने वाले कॉल से सावधान रहना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाए तो बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करे। इसके अलावा साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराए, संबंधित बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को तत्काल सूचना दे तथा आवश्यकता पड़ने पर नजदीकी पुलिस थाने या साइबर सेल में शिकायत करे। शीघ्र शिकायत करने से ठगी गई राशि को रोकने या वापस पाने की संभावना बढ़ सकती है।

कार्यक्रम में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परसाडीह से धनीराम साहू, लखन लाल, अजय कुमार टंडन, लकेश्वर कुमार बंजारे, सुनीता चंद्रा, राजकमल, द्वास राम कश्यप, वीरेंद्र कुमार निराला, सुमन जांगड़े और अशोक चौहान सहित समस्त व्याख्याता एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। शिविर के माध्यम से लोगों को साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने और डिजिटल लेनदेन के दौरान सुरक्षा उपाय अपनाने का संदेश दिया गया।

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