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हवा में बनेगा नगरपालिका का नया भवन! न ड्राइंग, न डिजाइन, फिर भी ढाई करोड़ का टेंडर

जांजगीर में डीईओ कार्यालय हटाने की चर्चा से मचा हड़कंप, जमीन का स्थल चयन तक नहीं और भवन निर्माण की निविदा प्रक्रिया पर उठे सवाल

जांजगीर-चांपा। जिला मुख्यालय जांजगीर में इन दिनों जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय को हटाकर वहां नगरपालिका जांजगीर-नैला का नया भवन बनाने की खबर चर्चा का विषय बनी हुई है। इस खबर से शिक्षा विभाग में हलचल मची हुई है। हैरानी की बात यह है कि नगरपालिका के नए भवन के लिए अभी स्थल चयन नहीं हुआ है, लेकिन नगरपालिका के इंजीनियर के मुताबिक करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत से भवन निर्माण के लिए टेंडर हो चुका है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर जमीन तय किए बिना और ड्राइंग-डिजाइन की स्थिति स्पष्ट हुए बिना टेंडर की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ गई?

डीईओ कार्यालय हटाने की जानकारी, लिखित आदेश नहीं

जिला शिक्षा अधिकारी मनोहर प्रताप सिंह ने बताया कि उन्हें डीईओ कार्यालय हटाए जाने की जानकारी मिली है, लेकिन इस संबंध में अभी तक कोई लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि कार्यालय को यथावत रखे जाने की मांग करते हुए कलेक्टर को पत्र लिखा जाएगा।

डीईओ कार्यालय को हटाकर तहसील कार्यालय के पास स्थानांतरित किए जाने की चर्चा है। हालांकि, कार्यालय को हटाने और नई जगह स्थानांतरित करने के संबंध में आधिकारिक आदेश की स्थिति स्पष्ट नहीं है।

सीएमओ ने बताया पीआईसी में हुआ प्रस्ताव

नगरपालिका के नए भवन के निर्माण को लेकर नगरपालिका सीएमओ का कहना है कि नए भवन की योजना बनाई गई है और इसके लिए पीआईसी में प्रस्ताव भी हुआ है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी नगरपालिका के इंजीनियर दे सकते हैं।

जब नगरपालिका के इंजीनियर से नए भवन के निर्माण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत से भवन निर्माण के लिए टेंडर हो चुका है। लेकिन जब उनसे स्थल चयन और ड्राइंग-डिजाइन के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि अभी स्थल चयन नहीं हुआ है।

इंजीनियर के इस बयान के बाद निर्माण प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। सामान्य तौर पर किसी निर्माण परियोजना में स्थल की पहचान, तकनीकी जरूरतों का आकलन, ड्राइंग-डिजाइन और प्राक्कलन जैसी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण होती हैं। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित भवन का प्रस्ताव किस स्थान के लिए तैयार किया गया है और टेंडर किन तकनीकी दस्तावेजों के आधार पर जारी किया गया।

राजस्व रिकॉर्ड में जमीन का पुराना ब्योरा

राजस्व दस्तावेजों के मुताबिक, वर्तमान में जहां डीईओ कार्यालय संचालित है, उस जमीन का जिला बनने से पहले खसरा नंबर 2746, 4066, 4060, 4080, 4087, 4111/16 और 4111/226 सहित कुल 17.45 एकड़ रकबा आबादी उच्चतर माध्यमिक के नाम दर्ज बताया गया है।

बाद में खसरा नंबर 2746/1/छ, रकबा 0.9220 और 2746/1/ज, रकबा 7.0610 शासकीय मद में दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि इसी जमीन पर नगरपालिका का नया भवन बनाने की योजना है। हालांकि, इस संबंध में जमीन के वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड, स्वामित्व, उपयोग और भवन निर्माण के लिए उसकी उपयुक्तता की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

भविष्य में नगर निगम बनने की संभावना के मद्देनजर नई योजना?

चर्चा है कि भविष्य में जांजगीर-नैला को नगर निगम बनाने की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए नगरपालिका का नया भवन तैयार करने की योजना बनाई जा रही है। इसी उद्देश्य से वर्तमान डीईओ कार्यालय को हटाकर तहसील कार्यालय के पास स्थानांतरित करने की तैयारी की बात कही जा रही है।

हालांकि, नई इमारत के लिए स्थल चयन, डीईओ कार्यालय के स्थानांतरण और टेंडर की तकनीकी प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक स्थिति सामने आना बाकी है।

अब उठ रहे हैं ये सवाल

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि नए नगरपालिका भवन के लिए स्थल चयन अभी नहीं हुआ है, तो ढाई करोड़ रुपये की निविदा किस आधार पर जारी की गई? क्या भवन का ड्राइंग-डिजाइन और तकनीकी प्राक्कलन तैयार है? डीईओ कार्यालय को हटाने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया है और संबंधित जमीन पर निर्माण के लिए आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त हुई है या नहीं?

फिलहाल डीईओ कार्यालय को हटाने की चर्चा और नगरपालिका भवन के टेंडर को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों से इन बिंदुओं पर आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी।

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