वेदांता पावर प्लांट हुए बॉयलर ब्लास्ट मामले में दोषी प्रबंधन के खिलाफ FIR और आवश्यक कार्रवाई की मांग

सक्ती। वेदांता पावर प्लांट, सिंघीतराई (जिला सक्ती) में हुए भीषण बॉयलर विस्फोट को कॉर्पोरेट आपराधिक लापरवाही, असुरक्षित औद्योगिक पुनरुद्धार (Unsafe Industrial Revival), जानबूझकर मानव जीवन को खतरे में डालने (Knowingly Endangering Human Life), श्रमिक सुरक्षा मानकों के उल्लंघन एवं प्रशासनिक विफलता का परिणाम मानते हुए भारतीय जनाधिकार पार्टी के संयोजक व अध्यक्ष दीपक दुबे ने नामजद FIR पंजीकरण, दोषियों की गिरफ्तारी, साक्ष्य जब्ती, स्वतंत्र SIT जांच, प्लांट सीलिंग, उच्च मुआवजा एवं 07 दिवस की समयसीमा में कठोर कार्यवाही सुनिश्चित किए जाने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि बीते 14 अप्रैल को को वेदांता समूह द्वारा संचालित Athena Chhattisgarh Power Limited (2×600 MW), ग्राम सिंघीतराई, जिला सक्ती में घटित भीषण बॉयलर/स्टीम विस्फोट में 20 श्रमिकों की मृत्यु एवं करीब 2 दर्जन श्रमिकों के गंभीर रूप से झुलसने की घटना न केवल अत्यंत दुखद है, बल्कि यह स्पष्ट रूप से एक “Corporate Criminal Negligence” एवं “Knowingly Endangering Human Life” का गंभीर मामला है।
उन्होंने कहा कि घटना एवं प्रत्यक्ष तथ्य (Ground Facts of Incident) यह है कि
- दिनांक 14/04/2026 को वेदांता पावर प्लांट, सिंघीतराई (जिला सक्ती) में बॉयलर/स्टीम लाइन विस्फोट की घटना में अनेक श्रमिकों की मृत्यु एवं 30–50 से अधिक श्रमिकों के गंभीर रूप से झुलसने की घटना एक अत्यंत गंभीर औद्योगिक आपदा है, जो प्रथम दृष्टया आपराधिक लापरवाही को दर्शाती है।
- विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार 12–13 श्रमिकों की मृत्यु एवं बड़ी संख्या में श्रमिकों के गंभीर रूप से घायल होने की पुष्टि होती है, जिससे घटना की भयावहता एवं प्रबंधन की गंभीर विफलता स्पष्ट होती है।
- उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार बॉयलर/स्टीम पाइप में अत्यधिक प्रेशर एवं तकनीकी खराबी के कारण विस्फोट हुआ, जिससे लगभग 500 डिग्री तापमान की भाप फैलकर श्रमिकों को झुलसा गई — जो स्पष्ट रूप से तकनीकी निगरानी एवं सुरक्षा तंत्र की विफलता को दर्शाता है।
- घटना के समय श्रमिकों को न तो पूर्व चेतावनी दी गई और न ही सुरक्षित निकासी की कोई प्रभावी व्यवस्था थी, जिससे तत्काल मृत्यु एवं गंभीर चोटें हुईं।
तकनीकी एवं संचालन संबंधी गंभीर लापरवाही
- उक्त प्लांट मूलतः एक अधूरा एवं वर्षों से बंद प्रोजेक्ट था, जिसे अधिग्रहण के पश्चात बिना समुचित तकनीकी मूल्यांकन एवं संरचनात्मक परीक्षण के पुनः चालू किया गया।
- अधिग्रहण के बाद यूनिट-वार निर्माण प्रगति, मशीनरी की स्थिति एवं जोखिम मूल्यांकन का समुचित परीक्षण किए बिना वर्ष 2025 में जल्दबाजी में संचालन प्रारंभ किया गया।
- बिना सेफ्टी ऑडिट, बॉयलर फिटनेस परीक्षण, प्रेशर सिस्टम निरीक्षण, थर्ड पार्टी सत्यापन एवं पूर्ण ओवरहॉल के संचालन प्रारंभ करना श्रमिकों के जीवन को जानबूझकर खतरे में डालने के समान है।
- श्रमिकों को पर्याप्त PPE, प्रशिक्षण, मॉक ड्रिल एवं सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध नहीं कराया गया।
- ठेका श्रमिकों से जोखिमपूर्ण कार्य बिना सुरक्षा प्रोटोकॉल के कराया गया, जो स्पष्ट आपराधिक लापरवाही है।
- सेफ्टी ऑडिट एवं निरीक्षण केवल कागजी औपचारिकता होने की आशंका है, जिससे संगठित लापरवाही/मिलीभगत का संकेत मिलता है।
- पूर्व में तकनीकी खामियों एवं जोखिमों की जानकारी होने के बावजूद कोई निवारक कार्रवाई नहीं की गई।
- घटना के बाद चिकित्सा प्रबंधन में अव्यवस्था प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है।
A (EAC / Parivesh आधारित ठोस दस्तावेजी साक्ष्य)
- आधिकारिक EAC/Parivesh दस्तावेजों से स्पष्ट है कि परियोजना वर्ष 2016 तक केवल लगभग 60% ही पूर्ण थी, जिसके पश्चात यह वित्तीय विफलता के कारण बंद हो गई एवं IBC/CIRP प्रक्रिया में चली गई।
- वर्ष 2018 में परियोजना दिवालिया प्रक्रिया में चली गई तथा बाद में वेदांता द्वारा अधिग्रहित की गई — जिससे यह सिद्ध होता है कि परियोजना पूर्ण विकसित एवं सुरक्षित अवस्था में नहीं थी।
- परियोजना को “Public Hearing” से छूट दी गई, जिससे स्थानीय जनता एवं संभावित जोखिमों का समुचित मूल्यांकन नहीं किया गया — यह गंभीर प्रक्रियात्मक त्रुटि है।
- परियोजना की मूल Environmental Clearance वर्ष 2010 की थी, जिसकी वैधता 2016, 2017 एवं 2020 तक बढ़ाई गई — अर्थात यह पुराने डिजाइन एवं पुराने सुरक्षा मानकों पर आधारित थी।
- EAC द्वारा PM2.5 डेटा में त्रुटियां पाई गईं — जो तकनीकी एवं पर्यावरणीय मूल्यांकन में गंभीर खामियों को दर्शाता है।
- परियोजना में Fly Ash, जल उपयोग एवं प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित अनेक शर्तें लगाई गईं — जिससे यह स्पष्ट है कि परियोजना उच्च जोखिम वाली श्रेणी में थी।
- EAC द्वारा Green Belt, Pollution Monitoring, Ash Disposal एवं Environmental Compliance से संबंधित कड़े निर्देश दिए गए थे — जिनका पालन अनिवार्य था।
B (सुरक्षा एवं संचालन विफलता के स्पष्ट संकेत)
- परियोजना में बड़े स्तर पर Fly Ash (2.5–3.0 MTPA) एवं उच्च तापमान बॉयलर प्रणाली का उपयोग प्रस्तावित था, जो अत्यंत जोखिमपूर्ण औद्योगिक संचालन को दर्शाता है।
- Boiler एवं Pressure System के जोखिमों के बावजूद बिना पूर्ण re-validation एवं integrity testing के संचालन प्रारंभ करना गंभीर तकनीकी लापरवाही है।
- अधिग्रहण के बाद पूर्ण Plant Safety Audit, Boiler Integrity Test एवं System Overhaul किए जाने का स्पष्ट प्रमाण उपलब्ध नहीं है — जो गंभीर संदेह उत्पन्न करता है।
- EAC द्वारा 24×7 Monitoring, Zero Liquid Discharge एवं Safety Compliance जैसी अनिवार्य शर्तें लागू थीं — जिनका उल्लंघन होने पर यह प्रत्यक्ष कानून उल्लंघन है।
- Occupational Health Surveillance एवं Worker Safety संबंधी निर्देशों का पालन नहीं किया गया — जो श्रमिक सुरक्षा के प्रति घोर लापरवाही दर्शाता है।
C (कॉर्पोरेट आपराधिक लापरवाही का स्पष्ट निष्कर्ष)
- अधूरी (60%) एवं वर्षों से बंद परियोजना को बिना पूर्ण तकनीकी पुनरुद्धार के चालू करना “Unsafe Industrial Revival” का स्पष्ट उदाहरण है।
- पुरानी Environmental Clearance (2010) के आधार पर संचालन करना “Outdated & Risky Infrastructure Operation” को दर्शाता है।
- Public Hearing से छूट मिलने के कारण जनसुरक्षा का समुचित मूल्यांकन नहीं किया गया।
- EAC द्वारा चिन्हित तकनीकी कमियों के बावजूद संचालन की अनुमति देना प्रशासनिक एवं नियामक विफलता को दर्शाता है।

उपरोक्त समस्त तथ्य, तकनीकी दस्तावेज, सरकारी अभिलेख (EAC/Parivesh), मीडिया रिपोर्ट एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्य यह स्पष्ट रूप से सिद्ध करते हैं कि—
यह घटना मात्र एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि
“Corporate Criminal Negligence” + “Unsafe Industrial Revival” + “Knowingly Endangering Human Life” का गंभीर एवं सुनियोजित उदाहरण है।
इसमें कंपनी प्रबंधन द्वारा व्यावसायिक लाभ को प्राथमिकता देते हुए श्रमिकों के जीवन एवं सुरक्षा को जानबूझकर जोखिम में डाला गया। साथ ही संबंधित नियामक एवं शासकीय तंत्र द्वारा निगरानी में विफलता भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।
▪️इस पर कठोर एवं समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जाए ।
इस घातक औद्योगिक दुर्घटना, 20 श्रमिकों की मृत्यु, 2 दर्जन श्रमिक गंभीर घायल, अधूरी परियोजना, EAC/Parivesh दस्तावेज, तकनीकी विफलता एवं सुरक्षा उल्लंघन) के आलोक में अनिवार्य कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
आपराधिक कार्यवाही
- कंपनी प्रबंधन, चेयरमैन/शीर्ष अधिकारी, प्लांट प्रमुख, सेफ्टी अधिकारी एवं संबंधित ठेकेदारों के विरुद्ध श्रमिकों की मृत्यु एवं गंभीर चोट (बॉयलर विस्फोट) के लिए IPC धारा 304, 304A, 120B, 287, 337, 338 के अंतर्गत तत्काल नामजद FIR दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए।
- अधूरी (60%) परियोजना, ज्ञात तकनीकी जोखिम एवं सुरक्षा विफलता के बावजूद संचालन किए जाने को दृष्टिगत रखते हुए प्रकरण में धारा 304 (Culpable Homicide) लागू की जाए।
- जांच प्रभावित न हो इसके लिए आरोपियों के विरुद्ध Look Out Circular जारी कर देश छोड़ने पर रोक लगाई जाए।
- घटना से संबंधित लॉगबुक, DCS/SCADA डेटा, बॉयलर संचालन रिकॉर्ड, मेंटेनेंस रजिस्टर, सेफ्टी ऑडिट, फिटनेस प्रमाणपत्र, निरीक्षण रिपोर्ट एवं CCTV फुटेज को तत्काल जब्त कर सुरक्षित किया जाए।
- कंट्रोल रूम सर्वर, हार्ड डिस्क एवं डिजिटल सिस्टम का फॉरेंसिक ऑडिट कर तकनीकी विफलता के वास्तविक कारणों की जांच की जाए।
- साक्ष्य नष्ट होने की संभावना को रोकने हेतु प्लांट परिसर को सील कर डिजिटल बैकअप सुरक्षित किया जाए।
- बॉयलर/पावर सेक्टर विशेषज्ञों, न्यायिक अधिकारी एवं स्वतंत्र सदस्यों सहित उच्च स्तरीय SIT गठित की जाए।
- जांच को कॉर्पोरेट/प्रशासनिक प्रभाव से मुक्त रखते हुए 15–30 दिवस में पूर्ण किया जाए।
- जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक कर पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
- दुर्घटना के मद्देनजर प्लांट/यूनिट का संचालन तत्काल बंद कर सील किया जाए।
- सभी बॉयलर, स्टीम लाइन एवं प्रेशर सिस्टम का स्वतंत्र थर्ड पार्टी सेफ्टी ऑडिट कराया जाए।
- प्रत्येक मृतक श्रमिक के आश्रितों को ₹50,00,000 मुआवजा एवं एक आश्रित को रोजगार तत्काल प्रदान किया जाए।
- प्रत्येक गंभीर घायल को ₹15,00,000 मुआवजा एवं सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में निःशुल्क उपचार सुनिश्चित किया जाए।
- सभी घायलों हेतु दीर्घकालिक चिकित्सा, विकलांगता सहायता, बीमा भुगतान एवं पुनर्वास योजना लागू की जाए।
- विगत वर्षों के सेफ्टी ऑडिट, बॉयलर फिटनेस, निरीक्षण रिपोर्ट एवं संचालन स्वीकृतियों की जांच कर कागजी अनियमितता/मिलीभगत उजागर की जाए।
- निरीक्षण/नियमन में लापरवाही करने वाले शासकीय अधिकारियों पर विभागीय एवं आपराधिक कार्रवाई की जाए।
- श्रम, उद्योग, पर्यावरण एवं ऊर्जा विभाग की भूमिका की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।
- घटना को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन मानते हुए NHRC में प्रस्तुत किया जाए।
- पर्यावरणीय शर्तों (EC, Pollution Control) के उल्लंघन की जांच हेतु NGT एवं CPCB को संदर्भित किया जाए।
- कार्यवाही की प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक कर जन निगरानी सुनिश्चित की जाए।
- उच्च स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी गठित कर जिम्मेदारी तय की जाए।
- उपरोक्त सभी कार्यवाही 07 दिवस के भीतर प्रारंभ कर स्पष्ट प्रगति प्रदर्शित की जाए।
उपरोक्त आधिकारिक MoEF&CC/EAC अभिलेखों, तकनीकी तथ्यों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह निर्विवाद रूप से सिद्ध होता है कि उक्त परियोजना को अधूरी निर्माण अवस्था (लगभग 60%), पुरानी पर्यावरणीय स्वीकृतियों एवं अपर्याप्त तकनीकी एवं सुरक्षा सत्यापन के आधार पर पुनः संचालित किया गया, जो प्रत्यक्ष रूप से असुरक्षित औद्योगिक पुनरुद्धार (Unsafe Industrial Revival) एवं मानव जीवन को जानबूझकर खतरे में डालने (Knowingly Endangering Human Life) का गंभीर उदाहरण है; परिणामस्वरूप दिनांक 14/04/2026 की घातक दुर्घटना कोई आकस्मिक घटना न होकर स्पष्ट रूप से कॉर्पोरेट आपराधिक लापरवाही (Corporate Criminal Negligence) का परिणाम है।”
देश के विभिन्न हिस्सों में वेदांता समूह की परियोजनाओं में पूर्व में भी गंभीर औद्योगिक दुर्घटनाएं घटित हो चुकी हैं, जिनमें वर्ष 2009 का BALCO कोरबा चिमनी हादसा विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जिसमें 40 से अधिक श्रमिकों की मृत्यु हुई थी तथा जांच में घटिया निर्माण, डिजाइन त्रुटि एवं सुरक्षा लापरवाही प्रमाणित हुई थी। इसी प्रकार वर्तमान सक्ती (2026) बॉयलर विस्फोट घटना भी उसी प्रकार की तकनीकी विफलता एवं सुरक्षा उपेक्षा को दर्शाती है। इन घटनाओं का समग्र विश्लेषण यह स्पष्ट करता है कि कंपनी में सुरक्षा मानकों की निरंतर अनदेखी, जल्दबाजी में संचालन एवं जोखिमपूर्ण औद्योगिक कार्यप्रणाली का एक स्थापित पैटर्न विद्यमान है,
उन्होंने कहा कि निर्धारित समय में FIR, चेयरमैन सहित जिम्मेदार व्यक्तियों के गिरफ्तारी, मुआवजा एवं उपचार सुनिश्चित न होने पर धारा 156(3) CrPC के अंतर्गत न्यायालय, उच्च न्यायालय में PIL, NHRC/NGT में शिकायत एवं 7 दिवस बाद अनिश्चितकालीन जन आंदोलन प्रारंभ किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।