छत्तीसगढ़जांजगीर-चांपा

निराला साहित्य मंडल ने मनाई महाकवि तुलसीदास जयंती, ईश-भक्ति सिर्फ धनवान होने से नहीं, पूर्वजन्म के संस्कारों से प्राप्त होती है-पूज्या दीदी सविता गोस्वामी

जांजगीर चांपा। साहित्य सेवा के क्षेत्र में वर्ष 1961 से अनवरत सेवारत सक्रिय,अग्रणी एवं प्राचीनतम साहित्यिक संस्था निराला साहित्य मंडल, निराला साहित्य महिला मंडल चांपा के तत्वावधान में महाकवि एवं रामभक्त गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती के पावन अवसर पर डी.बी. तनिष्क, सिवनी चौक, चांपा में गरिमामय साहित्यिक एवं आध्यात्मिक समारोह का आयोजन किया गया।

समारोह की मुख्य अतिथि परम विदुषी, श्रीमद्भागवत महापुराण की सुप्रसिद्ध कथावाचिका एवं धर्म-अध्यात्म तथा संस्कार चेतना की संवाहिका पूज्या दीदी सविता गोस्वामी एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. कुमुदिनी द्विवेदी, जिला शिक्षा अधिकारी,सक्ती तथा लोकेश बंसल, एसडीओपी, चांपा उपस्थित थे। इस अवसर पर वृंदावन से पधारीं दीदी कृष्णा एवं दीदी वंदना भी मंचासीन थीं। मंच पर प्रवक्ता के रूप में अंचल के प्रकांड विद्वान भागवत भूषण पं. दिनेश दुबे, मुख्य संरक्षक पं. हरिहर प्रसाद तिवारी, पं. अखिलेश कोमल पाण्डेय एवं नंदा बुक डिपो के संचालक नागेंद्र गुप्ता उपस्थित थे। इसके साथ ही मंडल के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल एवं कार्यकारी अध्यक्ष पं. धीरेंद्र वाजपेयी विशेष रूप से मंचासीन थे।

कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य अतिथि पूज्या दीदी सविता गोस्वामी सहित मुख्य संरक्षक, समस्त प्रवक्तागण, अध्यक्ष एवं कार्यकारी अध्यक्ष द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां सरस्वती, गोस्वामी तुलसीदास जी, निराला जी एवं कीर्तिशेष मोहनलाल वाजपेयी जी के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर पूजन-वंदन किया गया। इसके उपरांत वरिष्ठ उपाध्यक्ष अखिलेश कोमल पाण्डेय ने समवेत स्वर में निराला रचित सरस्वती वंदना कराई।

तत्पश्चात मंचस्थ विभूतियों का स्वागत-अभिनंदन मंडल के अध्यक्ष, कार्यकारी अध्यक्ष एवं पदाधिकारियों द्वारा कौशेय वस्त्र, श्रीफल एवं गुलदस्ता भेंटकर किया गया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि की प्यारी छोटी सी बिटिया विभूति गोस्वामी ने सुंदर भजन की प्रस्तुति देकर मंचस्थ विभूतियों,एवं उपस्थितों को मंत्र मुग्ध कर दिया। छोटी सी बिटिया की प्रस्तुति को सभी ने मुक्त कंठ से सराहा।

गोस्वामी तुलसीदास की जयंती अवसर पर मुख्य अतिथि पूज्या दीदी सविता गोस्वामी ने अपने उद्बोधन में कहा कि, “भगवान अपने हाथों जिसको नचाना चाहते हैं, उसे संपत्ति देते हैं और जिसके हाथों स्वयं नाचना चाहते हैं, उसे अपनी भक्ति प्रदान करते हैं।” उन्होंने कहा कि भक्ति धन-संपत्ति की मोहताज नहीं है। यह आवश्यक नहीं कि धनवान व्यक्ति के पास ही भक्ति हो और निर्धन व्यक्ति भक्ति से वंचित हो। भक्ति पूर्वजन्म के संस्कारों से प्राप्त होती है।

दीदी सविता गोस्वामी ने विदुर एवं शबरी के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे धनवान नहीं थे, किंतु उनकी अनन्य भक्ति के कारण भगवान को उनके यहां स्वयं पधारना पड़ा। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति में ऐसी शक्ति होती है, जो भगवान को भी भक्त के द्वार तक खींच लाती है। इस अवसर पर पूज्या दीदी सविता गोस्वामी ने सुमधुर भजन प्रस्तुत किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो गया।

कार्यक्रम के संचालन उद्बोधन में मंडल के प्रधान सचिव डॉ. रविन्द्र कुमार द्विवेदी ने कहा कि महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस की रचना कर भारतीय जनमानस को भक्ति, मर्यादा, नीति एवं लोकमंगल का अनुपम संदेश दिया। उन्होंने ‘राम’ शब्द की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हम ‘राम-राम’ क्यों कहते हैं। वर्णमाला के क्रम के अनुसार ‘र’ 27वें, ‘आ’ 2वें और ‘म’ 25वें स्थान पर आता है। इनका योग 54 होता है। ‘राम-राम’ दो बार कहने पर 108 की संख्या पूर्ण होती है, जो एक माला के जप के बराबर मानी जाती है।

मंडल के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपनी एकनिष्ठ भक्ति एवं साधना से रामचरितमानस जैसे कालजयी ग्रंथ की रचना की और करोड़ों लोगों को जीवन जीने की कला एवं आदर्श प्रदान किए। उन्होंने कहा कि तुलसीदास जी का समर्पण और भक्ति आज भी प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है।

भागवत भूषण पं. दिनेश दुबे ने निराला साहित्य मंडल के आयोजन एवं कार्यकारी अध्यक्ष पं. धीरेंद्र वाजपेयी द्वारा की गई भव्य एवं सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि महाकवि तुलसीदास जी का वाङ्मय अत्यंत व्यापक एवं विराट है। उनकी रचनाओं में सत्य, शील, सौंदर्य, नीति, सदाचार, व्यवहार, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य जैसे जीवनोपयोगी एवं कल्याणकारी तत्वों का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि तुलसीदास जी ने साहित्य को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बनाया, बल्कि उसे लोकमंगल एवं चरित्र-निर्माण का सशक्त साधन बनाया।

मुख्य संरक्षक पं. हरिहर प्रसाद तिवारी ने कहा कि महाकवि तुलसीदास जी ने अपनी रचनाओं में कुसंग और सत्संग के प्रभाव को विभिन्न प्रसंगों एवं घटनाओं के माध्यम से अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। उन्होंने कुसंग को पतन एवं विनाश का कारण तथा सत्संग को जीवन के उत्थान का आधार बताया। उन्होंने कहा कि आज के घोर अव्यवस्था, अशांति एवं निराशा से भरे वातावरण में तुलसीदास जी के आदर्श एवं सिद्धांत समाज को सही दिशा देने में अत्यंत प्रासंगिक हैं। यही कारण है कि वे युगों-युगों तक महान, लोकनायक एवं जनपूज्य बने रहेंगे।

प्रवक्ता नागेंद्र गुप्ता ने गोस्वामी तुलसीदास जी के जीवन-चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका बाल्यकाल अत्यंत कष्टमय रहा। जीवन के संघर्षों एवं पत्नी की प्रेरणा ने उनके जीवन की दिशा बदल दी और वे सांसारिक मोह से ऊपर उठकर प्रभु श्रीराम की अनन्य भक्ति में लीन हो गए। उन्होंने रामचरितमानस जैसे कालजयी ग्रंथ की रचना कर भारतीय साहित्य एवं संस्कृति को अमूल्य निधि प्रदान की। उन्होंने कहा कि तुलसीदास जी की भक्ति, साधना और आदर्शों की व्यापकता को शब्दों में समेटना अत्यंत कठिन है।

इस अवसर पर नंदा बुक डिपो के संचालक नागेंद्र गुप्ता द्वारा प्रदत्त हनुमान चालीसा एवं सुंदरकांड की प्रतियों का उपस्थित श्रद्धालुओं एवं साहित्यप्रेमियों के बीच वितरण किया गया।

कार्यक्रम के अंतिम उद्बोधन में मंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अखिलेश कोमल पाण्डेय ने कहा कि महाकवि तुलसीदास जी की जयंती उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लेने का पावन अवसर है। उन्होंने कहा कि हम सभी को भगवान श्रीराम को अपना आराध्य मानकर तुलसीदास जी द्वारा बताए गए सत्य, मर्यादा, सदाचार, भक्ति एवं लोकमंगल के मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए।

कार्यक्रम का काव्यमय एवं प्रभावी संचालन मंडल के प्रधान सचिव डॉ. रविन्द्र कुमार द्विवेदी ने किया। मुख्य अतिथि, मंचस्थ विभूतियों, जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों एवं समस्त उपस्थितजनों के प्रति आभार प्रदर्शन डी.बी. वेंचर्स के संचालक एवं मंडल के कार्यकारी अध्यक्ष पं. धीरेंद्र वाजपेयी ने किया। स्वल्पाहार के आत्मीय आमंत्रण के साथ समारोह का समापन हुआ।

समारोह में पं. शैलेष शर्मा (ब्यूरो चीफ, हरिभूमि), शशिभूषण सोनी (मीडिया प्रभारी), श्रीमती सोमा गोस्वामी, सुनील गोस्वामी, बिटिया विभूति गोस्वामी, रतन यादव, लायनेस पूर्व डिस्ट्रिक्ट प्रेसिडेंट संगीता अग्रवाल, एडवोकेट रीतू तिवारी, पार्षद अंजलि, कविता देवांगन, गीता केशव सोनी, शर्मिष्ठा कंसारी, भुवनेश्वर देवांगन, तरुण राठौर, नरेंद्र शर्मा, परिमल बाजपेयी, अजय शर्मा, मंसूर खान, माही थवाईत, शंकर शर्मा, कमल महंत, कुशल गौराहा, डी.बी. तनिष्क स्टाफ, कॉलोनीवासी सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी, श्रद्धालु एवं सुधि श्रोतागण उपस्थित थे।

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