किसानों ने कलेक्ट्रेट में दिया धरना, 1700 करोड़ की लंबित धान बोनस राशि समेत 11 सूत्रीय मांगों को लेकर उठाई आवाज

भारतीय किसान संघ ने धान खरीदी व्यवस्था में सुधार, 40 किलो 700 ग्राम की तौल सीमा, सिंचाई-बिजली समस्या के समाधान और खाद की कालाबाजारी रोकने की मांग की
जांजगीर-चांपा। भारतीय किसान संघ छत्तीसगढ़ प्रदेश के बैनर तले किसानों ने जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन कर किसान हितों से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। भारतीय किसान संघ के प्रांत उपाध्यक्ष देव प्रसाद तिवारी के तत्वावधान में आयोजित प्रदर्शन के बाद किसानों ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। किसानों ने लंबित धान बोनस राशि के भुगतान, कृषक उन्नति योजना को प्रभावी बनाने, धान खरीदी व्यवस्था में सुधार, कृषि बिजली की समस्याओं के निराकरण, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और कृषि उपज का उचित मूल्य दिलाने सहित कई मांगें रखीं।
किसानों का कहना है कि लगातार बढ़ती कृषि लागत के बीच खेती को लाभकारी बनाए रखने के लिए उपज का उचित मूल्य और खेती के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है।
2022-23 की लंबित बोनस राशि का भुगतान
भारतीय किसान संघ ने वर्ष 2022-23 की लंबित लगभग 1700 करोड़ रुपये की धान बोनस राशि का किसानों को भुगतान करने की मांग की। साथ ही धान के समर्थन मूल्य में वृद्धि का लाभ किसानों को देने तथा कृषक उन्नति योजना के तहत प्रति एकड़ 800 रुपये का प्रावधान करने की मांग भी की गई।
15 नवंबर से 15 फरवरी तक हो धान खरीदी
ज्ञापन में किसानों ने धान खरीदी की अवधि 15 नवंबर से 15 फरवरी तक निर्धारित करने की मांग की। इसके अलावा प्रति टोकन अधिकतम 40 क्विंटल अथवा 7500 किलो धान खरीदी की व्यवस्था करने, किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया सरल बनाने और सभी खातेदारों के लिए पंजीयन की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग रखी गई।
टोकन व्यवस्था में सुधार करते हुए बड़े किसानों को 5 टोकन, लघु किसानों को 3 और सीमांत किसानों को 2 टोकन दिए जाने की मांग भी की गई।
40 किलो 700 ग्राम से अधिक तौल नहीं लेने की मांग
किसानों ने धान खरीदी में निर्धारित मात्रा से अधिक धान लिए जाने पर रोक लगाने की मांग करते हुए प्रति तौल अधिकतम 40 किलो 700 ग्राम धान लेने का शासन स्तर से स्पष्ट आदेश जारी करने की मांग की।
भारतीय किसान संघ का कहना है कि 13 अक्टूबर 2025 को गजेंद्र यादव ने भारतीय किसान संघ के मंच से किसानों और मीडिया के समक्ष 40 किलो 700 ग्राम से अधिक धान नहीं लिए जाने तथा अन्य किसान हितों से जुड़ी घोषणाएं की थीं, लेकिन संगठन के अनुसार संबंधित आदेश जारी नहीं हुआ है। उपलब्ध रिपोर्टों में भी 13 अक्टूबर 2025 को गजेंद्र यादव द्वारा किसानों को 40 किलो 700 ग्राम से अधिक धान नहीं लिए जाने और अन्य मुद्दों पर आश्वासन दिए जाने का उल्लेख है।
सिंचाई और कृषि बिजली की समस्याओं के समाधान की मांग
किसानों ने लंबित सिंचाई परियोजनाओं में तेजी लाने, खेतों तक पर्याप्त सिंचाई सुविधा पहुंचाने तथा कृषि विद्युत से जुड़ी समस्याओं का तत्काल निराकरण करने की मांग की। इसके साथ ही विद्युत विभाग के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।
बिचौलियों और खाद की कालाबाजारी पर कार्रवाई
भारतीय किसान संघ ने कृषि उपज की खरीदी-बिक्री में बिचौलियों की मनमानी पर रोक लगाने तथा भूमि अधिग्रहण के दौरान किसान हितों की रक्षा करने की मांग की। वहीं बाजार में निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर खाद बेचने वाले विक्रेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और खाद की कालाबाजारी पर प्रभावी रोक लगाने की मांग भी की गई। संगठन की ऐसी मांगें हालिया किसान प्रदर्शनों में भी सामने आई हैं।
किसानों ने फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन, लंबित सिंचाई परियोजनाओं को गति देने और कृषि क्षेत्र से जुड़ी अन्य समस्याओं के समाधान की भी मांग की।
धरना-प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि किसानों की समस्याओं का समाधान और कृषि व्यवस्था में सुधार सुनिश्चित कराना है। भारतीय किसान संघ ने शासन-प्रशासन से मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द आवश्यक निर्णय लेने की अपेक्षा जताई।
इन मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष, संजय सिंह तहसील अध्यक्ष, नवनीत सिंह राणा तहसील उपाध्यक्ष, राम सजीवन कुंभकार, संघ के वरिष्ठ सदस्य युगल किशोर ,सिंह टेक सिंह, रविकांत कश्यप, सुंदरलाल साहू, संजय कश्यप, मोहन कश्यप सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।