
रायपुर, ब्यूरो। न नौकरी के लिए डिग्री चाहिए, न इंटरव्यू… बस जेबकतरापन आना चाहिए और मोबाइल चोरी में महारत होनी चाहिए। बदले में महीने की ₹25,000 सैलरी और देशभर घूमने का मौका! सुनने में अजीब लगता है, लेकिन रायपुर पुलिस ने ऐसा ही एक संगठित गिरोह पकड़ा है, जो “क्रिमिनल रिक्रूटमेंट” के लिए मशहूर था।
गिरोह का बॉस और ‘भर्ती योजना’
देवा उर्फ देव कुमार महतो, झारखंड के साहेबगंज का रहने वाला। दिखने में आम इंसान, लेकिन दिमाग शातिर। यह बेरोजगार और गरीब युवाओं को नौकरी का लालच देता— ₹25,000 महीने, ट्रेनिंग फ्री, और पोस्टिंग देशभर में। ट्रेनिंग में सिखाया जाता— भीड़ में मोबाइल कैसे निकालना, ट्रेनों में शिकार कैसे ढूंढना, और चोरी के बाद तुरंत UPI के जरिए पैसा कैसे उड़ाना।
ऑपरेशन तीन चरणों में
देवा का गिरोह किसी कॉर्पोरेट कंपनी की तरह चलता था—
1. फील्ड टीम – बाजार और ट्रेनों में मोबाइल चोरी करती।
2. फाइनेंशियल टीम – चोरी हुए मोबाइल से खातों से रकम ट्रांसफर करती।
3. कैश टीम – कोलकाता से नकद निकालकर झारखंड पहुंचाती, फिर कमीशन बांटती।
पुलिस की ‘कांवड़िया’ प्लानिंग
22 जून को रायपुर के तेलीबांधा थाने में शिकायत आई— एक व्यक्ति का मोबाइल चोरी हुआ और उसके खाते से ₹1.85 लाख साफ हो गया। जांच में गिरोह के तार झारखंड और कोलकाता तक पहुंचे। श्रावण मास होने से पुलिस टीम ने कांवड़ियों का वेश धारण कर वहां डेरा डाला और मास्टरमाइंड समेत चार आरोपियों को दबोच लिया।
पकड़े गए आरोपी
देवा उर्फ देव कुमार महतो (28), साहेबगंज – मास्टरमाइंड
कन्हैया कुमार मंडल (22), साहेबगंज
विष्णु कुमार मंडल (22), साहेबगंज
ओम प्रकाश ठाकुर (31), कोलकाता – ठगी की रकम निकालने वाला
बरामद सबूत और बड़ा नेटवर्क
छापेमारी में 3 मोबाइल, 2 सिम कार्ड और 40-50 QR कोड मिले, जिनसे करोड़ों के लेन-देन के सबूत हाथ लगे। पुलिस ने 12 राज्यों में इनके मूवमेंट के सबूत जुटाए— बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, यूपी, उत्तराखंड और अन्य।
गिरफ्तारी के बाद खुलासा
गिरोह के खिलाफ IPC की धारा 303(2), 134 BNS और संगठित अपराध की धाराओं में मामला दर्ज है। पहले ही 6 आरोपी पकड़े जा चुके हैं, बाकी पर शिकंजा कसना बाकी है।
इस पूरे ऑपरेशन में थाना प्रभारी नरेंद्र मिश्रा, साइबर यूनिट प्रभारी परेश पांडे, उनि मुकेश सोरी समेत पुलिस और एंटी क्राइम टीम की बड़ी भूमिका रही।