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छत्तीसगढ़ पीएससी युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है: राजेश अग्रवाल

जांजगीर-चांपा। जिला कांग्रेस कमेटी जांजगीर-चांपा के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (पीएससी) की परीक्षा व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने यूपीएससी की तर्ज पर पीएससी परीक्षा आयोजित कराने का वादा किया था, लेकिन पिछले दो बार से पीएससी की परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोप सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछली परीक्षा वर्ष 2024 की उत्तर पुस्तिकाएं सामने आई हैं, जिनके मूल्यांकन में कथित अनियमितताओं के विस्तृत तथ्य सामने आए हैं।

2025 की परीक्षा को लेकर उठाए सवाल

राजेश अग्रवाल के अनुसार वर्ष 2025 में पीएससी द्वारा कुल 265 पद निकाले गए। नियम के अनुसार मुख्य परीक्षा में कुल पदों के तीन गुना अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए उत्तीर्ण होना चाहिए। इस हिसाब से 265×3 = 795 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए आना चाहिए था, लेकिन उनके अनुसार केवल 608 अभ्यर्थी ही साक्षात्कार के लिए पहुंचे।

आयोग का तर्क बताया जा रहा है कि 187 अभ्यर्थी न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर पाए। राजेश अग्रवाल ने आयोग से मांग की है कि वह यह साबित करे कि आखिर वे 187 अभ्यर्थी न्यूनतम अंक क्यों नहीं ला पाए। वहीं अभ्यर्थियों का दावा है कि उनके न्यूनतम अंक आए हैं।

उन्होंने मांग की कि साक्षात्कार से पहले सभी अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि अभ्यर्थी स्वयं देख सकें कि उनकी कॉपियों का मूल्यांकन सही तरीके से हुआ है या नहीं।

2024 की कॉपियों के मूल्यांकन पर भी सवाल

राजेश अग्रवाल ने दावा किया कि वर्ष 2024 की मुख्य परीक्षा की दो अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं सामने आई हैं, जिनमें मूल्यांकन में गड़बड़ी दिखाई देती है। उनके अनुसार दोनों कॉपियों के कुछ उत्तर समान अथवा सही होने के बावजूद अलग-अलग अंक दिए गए हैं।

  • प्रश्न क्रमांक 5(1) में दोनों परीक्षार्थियों के उत्तर सही और समान बताए गए हैं, लेकिन एक छात्र को 2 में से 0 अंक, जबकि दूसरे को 2 में से 2 अंक दिए गए।
  • भक्तिन माता राजिम/भक्ति माता राजिम तेलिन वाले उत्तर में प्रथम छात्र ने सही उत्तर लिखा, जिसे 8 में से 3.5 अंक मिले। वहीं दूसरे छात्र ने कथित रूप से गलत उत्तर “कोंडागांव व आदिवासी समाज की देवी” लिखा, फिर भी उसे 1.5 अंक दिए गए। राजेश अग्रवाल का कहना है कि गलत उत्तर होने पर इसमें 0 अंक मिलना चाहिए था।
  • छत्तीसगढ़ में होम रूल लीग की स्थापना से संबंधित प्रश्न में प्रथम छात्र ने होम रूल लीग का सही उत्तर लिखा, जिसे 4 में से 2.5 अंक मिले। वहीं दूसरे छात्र ने होम रूल लीग के संबंध में वर्ष 1923 एवं स्वराज दल का उत्तर लिखा, जिसे कांग्रेस की ओर से गलत बताया गया है, लेकिन उसे भी 2.5 अंक दिए गए। आरोप है कि सही और गलत उत्तर को समान अंक दिए गए।
  • घरेलू हिंसा में व्यथित व्यक्ति वाले प्रश्न में प्रथम अभ्यर्थी ने व्यथित व्यक्ति को पुरुष बताया, जिसे गलत बताते हुए उसे 2 में से 0.5 अंक मिले। वहीं दूसरे अभ्यर्थी के सही उत्तर पर भी 0.5 अंक दिए गए। राजेश अग्रवाल ने इसे सही और गलत उत्तर को बराबर अंक देने का मामला बताया।
  • बौद्ध धर्म में महाभिनिष्क्रमण से जुड़े प्रश्न में दोनों अभ्यर्थियों ने सही उत्तर लिखा बताया गया है। इसके बावजूद एक अभ्यर्थी को 2 में से 0.5 अंक, जबकि दूसरे को 1.5 अंक दिए गए।

पीएससी अध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल

राजेश अग्रवाल ने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों में पीएससी की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठे हैं। उनके अनुसार वर्ष 2024 में पीएससी अध्यक्ष रीता शांडिल्य के कार्यकाल में भी गड़बड़ी के आरोप लगे थे और वर्ष 2025 में भी उनकी ही अध्यक्षता में अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2024 की पीएससी परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं की जांच अपात्र स्कूली शिक्षकों/शिक्षक एलबी से कराए जाने की बात सामने आई थी। इतना ही नहीं, उनके अनुसार मूल्यांकनकर्ताओं के नाम और नंबर भी सार्वजनिक हो गए थे, जिसे उन्होंने भर्ती परीक्षा की गोपनीयता के लिहाज से बेहद आपत्तिजनक बताया।

राजेश अग्रवाल का आरोप है कि परीक्षा की गोपनीयता भंग करने वालों पर कार्रवाई करने के बजाय रीता शांडिल्य को पीएससी के कार्यकारी अध्यक्ष से अध्यक्ष पद पर पदोन्नत किया गया। उन्होंने इसे लेकर भाजपा सरकार पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इन गड़बड़ियों को विष्णुदेव साय सरकार का संरक्षण प्राप्त है।

2024 में भी 1:3 नियम को लेकर सवाल

राजेश अग्रवाल ने कहा कि राज्य सेवा परीक्षा 2024 में भी मुख्य परीक्षा के परिणाम के बाद साक्षात्कार के लिए केवल 95 अभ्यर्थियों को बुलाया गया था। उनके अनुसार उस समय भी पदों के मुकाबले 1:3 के अनुपात का पालन नहीं किया गया था।

उन्होंने कहा कि पीएससी जैसी महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है, क्योंकि प्रदेश के हजारों युवा वर्षों की मेहनत और उम्मीद के साथ परीक्षा में शामिल होते हैं। ऐसे में मूल्यांकन और चयन प्रक्रिया पर सवाल उठना युवाओं के भविष्य और उनके भरोसे दोनों के लिए गंभीर विषय है।

कांग्रेस की प्रमुख मांगें

राजेश अग्रवाल ने सरकार और पीएससी से मांग की है कि—

  1. मामले के निराकरण तक साक्षात्कार स्थगित किया जाए।
  2. अभ्यर्थियों की मांग के अनुसार साक्षात्कार से पहले सभी उत्तर पुस्तिकाएं सार्वजनिक की जाएं, ताकि अभ्यर्थी स्वयं देख सकें कि उनकी कॉपियों का मूल्यांकन सही तरीके से हुआ है या नहीं।
  3. जो अभ्यर्थी साक्षात्कार के लिए चयनित हुए हैं, उनके अतिरिक्त शेष सभी अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं निशुल्क उपलब्ध कराई जाएं।
  4. उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के लिए मूल्यांकनकर्ताओं का स्पष्ट मानदंड तय किया जाए तथा पीएससी परीक्षा के लिए मॉडल उत्तर जारी किया जाए।
  5. आयोग सभी अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कराए और साक्षात्कार के लिए 1:3 के नियम का पालन सुनिश्चित करे।

राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह केवल कुछ अभ्यर्थियों का मामला नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं के भविष्य और मेहनत से जुड़ा विषय है, जो पीएससी के माध्यम से अपने बेहतर भविष्य का सपना देखते हैं। उन्होंने सरकार और आयोग से मांग की कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच कराकर परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए, ताकि युवाओं का पीएससी पर भरोसा कायम रह सके।

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