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हिरासत में मौत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 25 लाख मुआवजे का आदेश; चांपा के शिव सहिस मामले ने भी खड़े किए सवाल

जांजगीर-चांपा/बिलासपुर। हिरासत में मौत के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख ने एक बार फिर पुलिस हिरासत में होने वाली घटनाओं और जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है। बिलासपुर से जुड़े 34 वर्षीय श्रवण सूर्यवंशी की कस्टडी में मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपते हुए मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच में हिरासत में हिंसा के लिए जो भी अधिकारी जिम्मेदार पाए जाएं, उनके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए।

न्यायालय ने CBI को मौत की परिस्थितियों के साथ-साथ उस पहलू की भी जांच करने को कहा है कि न्यायिक जांच में सिर पर चोट की बात सामने आने के बावजूद राज्य के अधिकारियों ने समय रहते उचित कार्रवाई क्यों नहीं की।

हाईकोर्ट बिलासपुर के एडवोकेट राजीव दुबे

कोर्ट के इस रुख के बीच चांपा के शिव सहिस की पुलिस हिरासत में मौत का मामला भी चर्चा में आ गया है। पुलिस के अनुसार शिव सहिस को 20 पाव अवैध शराब के मामले में थाने लाया गया था। पुलिस का कहना है कि रात में उसकी तबीयत बिगड़ गई और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

शिव सहिस की मौत की खबर मिलने के बाद परिजन और स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए। उन्होंने चांपा थाने का घेराव कर दिया। घंटों चले विरोध और बातचीत के बाद किसी तरह सहमति बनी।

अब इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल पुलिस हिरासत में तबीयत बिगड़ने से लेकर अस्पताल पहुंचने और मौत तक की परिस्थितियों को लेकर उठ रहा है। परिवार और लोगों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या जिम्मेदारी सामने आती है तो कार्रवाई की जाए।

हालांकि, श्रवण सूर्यवंशी और शिव सहिस के मामले अलग-अलग हैं। सुप्रीम कोर्ट का आदेश श्रवण सूर्यवंशी मामले से संबंधित है, लेकिन हिरासत में मौत के मामलों में न्यायालय द्वारा तय जवाबदेही और जांच के मानक चांपा मामले के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण सवाल जरूर खड़े करते हैं।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि शिव सहिस मामले में जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और परिवार को न्याय कब मिलता है।

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