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कृषि विभाग में अटैचमेंट विवाद: जनप्रतिनिधियों के दबाव में अफसरों पर मनमानी पोस्टिंग करने के आरोप

बिलासपुर। कृषि विभाग के बिलासपुर संभागीय कार्यालय में अटैचमेंट (संलग्नता) प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि विभाग में कई अटैचमेंट निर्णय नियमों के विपरीत, प्रभावशाली जनप्रतिनिधियों के दबाव में लिए जा रहे हैं। इसके चलते विभागीय कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है और किसान समस्याओं से जूझ रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, कुछ जनप्रतिनिधियों की सिफारिश पर चुनिंदा कर्मचारियों को मनचाही जगहों पर अटैचमेंट के जरिए पदस्थ कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि इन आदेशों में न तो विभागीय आवश्यकता का आकलन किया गया और न ही नियमों का पालन। इससे कई महत्वपूर्ण पद खाली हो गए हैं, जिसके कारण मैदानी स्तर पर कृषि से संबंधित योजनाओं व सेवाओं का समय पर संचालन नहीं हो पा रहा है।

किसान सहायता कार्य ठप जैसे हालात

वर्तमान स्थिति के कारण बीज एवं खाद वितरण, फसल मार्गदर्शन, खेत स्तर पर तकनीकी सहायता और अन्य कृषि योजनाओं में देरी हो रही है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है, जिनके लिए यह समय कृषि गतिविधियों का महत्वपूर्ण चरण माना जाता है।

दफ्तर में बढ़ा असंतोष, कार्रवाई की मांग

विभाग के भीतर भी इस प्रक्रिया को लेकर नाराजगी है। कई कर्मचारियों का कहना है कि प्रशासनिक नियमों की अनदेखी कर ‘चयनित’ कर्मचारियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। वहीं जनप्रतिनिधियों के दबाव में लिए जा रहे निर्णयों से विभाग में संतुलन बिगड़ रहा है।

जांच और संतुलित पदस्थापना की मांग

मामले की गंभीरता बढ़ते देख, विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से जांच की मांग की जा रही है। कृषि से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नियम के अनुसार आवश्यक स्थानों पर तैनाती नहीं की गई, तो इसका नुकसान किसानों को ही होगा।

अब यह देखना महत्वपूर्ण है कि शासन इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाता है और क्या विभागीय पारदर्शिता बहाल हो पाती है।