कोर्ट के सख्त तेवर! आदेश नहीं माना तो बीमा कंपनी के MD को जेल भेजने की चेतावनी, ROC मुंबई के अफसर को भी लगी फटकार

जांजगीर-चांपा। मोटर दुर्घटना में मृतक के पीड़ित परिवार को न्यायालय द्वारा तय क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान टालना बीमा कंपनी और कंपनी रजिस्ट्रार (ROC) मुंबई के अधिकारियों पर भारी पड़ गया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयदीप गर्ग ने न्यायालयीन आदेश की अनदेखी को गंभीर मानते हुए बीमा कंपनी और ROC मुंबई के खिलाफ सख्त रुख अपनाया।
दरअसल, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण में न्यायालय ने पीड़ित परिवार के पक्ष में क्षतिपूर्ति राशि देने का आदेश दिया था। भुगतान में लगातार देरी होने पर अदालत ने बीमा कंपनी की संपत्ति पर चार्ज बनाने के लिए ROC मुंबई को पत्र भेजा, लेकिन ROC ने आदेश का पालन करने से असमर्थता जताई। इसके बाद पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता राजन फुलर ने अवमानना याचिका दायर की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने ROC मुंबई के उप रजिस्ट्रार अरुण कुमार सिंह और बीमा कंपनी के विधि अधिकारी देशवंत मेहर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में तलब किया। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने दोनों अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कोर्ट के सख्त रुख के बाद दोनों अधिकारियों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए लिखित और मौखिक रूप से माफी मांगी। इसके बाद अदालत ने उन्हें सशर्त राहत देते हुए आदेश के पालन के लिए अंतिम 15 दिन का समय दिया।
साथ ही न्यायालय ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि तय समयसीमा में पीड़ित परिवार को क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो बीमा कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर सिविल जेल भेजा जाएगा। वहीं ROC मुंबई के खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अदालत के इस सख्त रुख को न्यायालयीन आदेशों की गरिमा बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।