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SIR को लेकर AAP का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला, आशुतोष गोपाल बोले- “लोकतंत्र को खत्म कर रहे हैं ज्ञानेश कुमार”

0 13 करोड़ से ज्यादा नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए जाने का दावा, CEC को हटाने और SIR रोकने की मांग; चुनाव आयोग ने सभी फैसलों को सर्वसम्मत बताया

रायपुर। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छत्तीसगढ़ में पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष गोपाल ने 23 सितंबर को जारी बयान में आरोप लगाया कि SIR के नाम पर लोकतांत्रिक व्यवस्था और मतदाताओं के अधिकारों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। हालांकि, ये आरोप AAP के हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।

आशुतोष गोपाल ने दावा किया कि पिछले करीब तीन वर्षों में देश के 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया के दौरान 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से हटाए गए हैं। The Indian Express की 23 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार भी SIR के तहत 30 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं।

AAP ने PM और गृह मंत्री पर भी लगाए आरोप

AAP प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए कथित तौर पर “वोट चोरी” का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस पूरे मामले का कथित मुख्य जिम्मेदार बताते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में AAP द्वारा बताए गए दावों और उनके कानूनी निष्कर्षों को अलग-अलग स्तर पर देखना जरूरी है। SIR में नाम हटना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि हर हटाया गया नाम किसी पात्र मतदाता का था या प्रक्रिया अवैध थी। ड्राफ्ट सूची के बाद दावे-आपत्तियों और सत्यापन की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है।

दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का मुद्दा भी उठाया

AAP ने चुनाव आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर सामने आई रिपोर्ट का भी हवाला दिया। Sukhbir Singh Sandhu और Vivek Joshi ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ निर्णयों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट के अनुसार ये आपत्तियां नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाताओं के नाम हटाने, Form-6 में बदलाव और मतदाता डेटाबेस के संचालन जैसे मुद्दों से संबंधित थीं।

इस रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि आंतरिक चर्चा में अलग-अलग सुझाव या टिप्पणियां आना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है और SIR समेत आयोग के फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

AAP की तीन बड़ी मांगें

आशुतोष गोपाल ने अपने बयान में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के सामने कई मांगें रखीं। इनमें प्रमुख रूप से—

1. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग।

2. SIR की प्रक्रिया तत्काल रोकने तथा तीन वर्ष पुरानी मतदाता सूची को बहाल करने की मांग।

3. पिछले तीन वर्षों में जिन चुनावों को कथित रूप से बदली हुई मतदाता सूचियों के आधार पर कराया गया, उन्हें निरस्त कर नई मतदाता सूची के आधार पर दोबारा चुनाव कराने की मांग।

AAP ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भी कथित “वोट चोरी” से जुड़े सबूत होने का दावा किया था और इसी मुद्दे को आधार बनाकर चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

“सड़क से कोर्ट तक लड़ाई” का ऐलान

आशुतोष गोपाल ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को सड़क से लेकर न्यायालय तक उठाएगी। उन्होंने SIR को लेकर मतदाताओं के अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए व्यापक विरोध की बात कही।

वहीं, चुनाव आयोग का पक्ष है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक शुद्ध बनाना तथा मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट या अपात्र मतदाताओं की पहचान करना है। आयोग ने हालिया विवाद के बीच यह भी कहा है कि उसके सभी फैसले कानून और आयोग के निर्देशों के अनुरूप लिए गए हैं तथा SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं।

इस तरह SIR को लेकर AAP के आरोप, चुनाव आयोग के जवाब और मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हुए बदलाव—तीनों फिलहाल राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और संस्थागत बहस का प्रमुख विषय बने हुए हैं।

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