30-35 साल से गांव में रह रहे परिवार, फिर भी घरों में नहीं पहुंची बिजली

0 करीब 15-20 बच्चे आज भी लालटेन की रोशनी में पढ़ने मजबूर, सांप-बिच्छू के खतरे के बीच गुजर रही जिंदगी; कलेक्टर से लेकर CM हेल्पलाइन तक शिकायत, फिर भी नहीं हुआ समाधान
जांजगीर चांपा। पकरिया (झूलन) विकास के दौर में जब गांव-गांव बिजली पहुंचाने और हर घर को रोशन करने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं ग्राम पकरिया (झूलन), नवागांव रोड के करीब सात परिवार आज भी अंधेरे में जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। सबसे दर्दनाक तस्वीर उन 15-20 बच्चों की है, जो शाम होते ही बिजली की रोशनी के बजाय लालटेन की मद्धम रोशनी में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
स्थानीय परिवारों का कहना है कि वे पिछले 30-35 वर्षों से इस क्षेत्र में निवासरत हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने घरों में रहने के बावजूद आज तक उनके घरों तक बिजली और पानी की समुचित व्यवस्था नहीं पहुंच पाई है।
शिकायतों के बाद भी नहीं मिली रोशनी
पीड़ित परिवारों के अनुसार, 16 फरवरी 2026 से वे लगातार बिजली कनेक्शन के लिए प्रयास कर रहे हैं। इस संबंध में करीब 4-5 बार कलेक्टर कार्यालय में आवेदन, दो बार जनशिकायत और सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत की जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक उनके घरों में बिजली नहीं पहुंची है।
परिवारों का कहना है कि उनके बच्चे 5वीं, 8वीं, 10वीं कक्षा के साथ कॉलेज में पढ़ रहे हैं। बिजली नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। शाम ढलते ही पढ़ाई के लिए लालटेन का सहारा लेना पड़ता है।
अंधेरे में सिर्फ पढ़ाई नहीं, सुरक्षा भी खतरे में
बिजली की समस्या केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है। परिवारों के मुताबिक रात के समय पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है। ऐसे में सांप-बिच्छू का डर हमेशा बना रहता है। अंधेरा होने के बाद चोरी और शराबियों के आने-जाने की आशंका भी बनी रहती है। इससे परिवारों को अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर चिंता रहती है।
एक तरफ बच्चे अपने भविष्य के लिए लालटेन की रोशनी में आंखें गड़ाकर पढ़ने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी तरफ माता-पिता हर रात इस डर में रहते हैं कि कहीं अंधेरे में कोई जहरीला जीव घर में न घुस आए।
सरपंच की NOC पर अटका कनेक्शन?
परिवारों का आरोप है कि कई बार सर्वे होने के बावजूद सरपंच द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) पर हस्ताक्षर नहीं किए जाने के कारण विद्युत कनेक्शन नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि क्षेत्र में शासकीय भूमि पर रहने वाले सरपंच, पंच और अन्य ग्रामीणों के घरों तक बिजली पहुंच चुकी है, लेकिन उनके घर आज भी अंधेरे में हैं।
पीड़ित परिवारों का सवाल है कि यदि आसपास रहने वाले अन्य परिवारों को बिजली मिल सकती है तो उनके बच्चों को रोशनी से वंचित क्यों रखा जा रहा है?
DA-JGUA योजना से जगी उम्मीद, फिर काम रुकने का आरोप
पीड़ित परिवारों के अनुसार, रायपुर के आदेश क्रमांक 5626, दिनांक 17 दिसंबर 2025 के तहत धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष अभियान (DA-JGUA) के अंतर्गत अविद्युतीकृत घरों को 100 प्रतिशत विद्युतीकरण करने के निर्देश दिए गए हैं।
परिवारों का कहना है कि इसी योजना के तहत 22 सितंबर 2026 को करीब 10 बजे विद्युत कार्य के लिए टीम मौके पर पहुंची थी। लेकिन उनके आरोप के अनुसार, जनपद अध्यक्ष, सरपंच, उपसरपंच और पंच द्वारा काम करने से रोका गया। काम करने वाली टीम को कथित तौर पर वहां से वापस भेज दिया गया और वाहन को जब्त करने की धमकी भी दी गई।
बच्चों का भविष्य रोशन होगा या अंधेरे में रहेगा?
करीब सात परिवारों की यह समस्या अब सिर्फ बिजली कनेक्शन की मांग नहीं रह गई है। यह उन 15-20 बच्चों के भविष्य का सवाल बन चुकी है, जो रोज लालटेन की रोशनी में अपने सपनों को पढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।
परिवारों का कहना है कि उन्होंने अधिकारियों के दरवाजे खटखटाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कलेक्टर कार्यालय से लेकर जनशिकायत और सीएम हेल्पलाइन तक अपनी समस्या पहुंचाई, लेकिन समाधान अब भी दूर है।
एक तरफ सरकार हर घर तक बिजली पहुंचाने की बात करती है, दूसरी तरफ पकरिया (झूलन) के इन घरों में शाम होते ही अंधेरा उतर आता है। लालटेन की छोटी-सी लौ के सहारे बच्चे अपनी किताबें खोलते हैं और माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य की चिंता में रात काटते हैं।
अब इन परिवारों की उम्मीद प्रशासन से है कि कागजों और शिकायतों से निकलकर बिजली का समाधान जमीन पर पहुंचे और वर्षों से अंधेरे में रह रहे इन घरों में भी रोशनी की किरण पहुंचे।