छत्तीसगढ़जांजगीर-चांपा

अन्नदाता ने हल छोड़कर आंदोलन का रास्ता चुन लिया? डोंगाकोहरौद में दूसरे दिन भी जारी अनशन को कांग्रेस विधायक शेषराज हरबंश का समर्थन मिला

आषाढ़ में जब किसान खेतों में होने चाहिए थे, तब वे सड़क के लिए आमरण अनशन पर बैठे हैं। आखिर ऐसी क्या मजबूरी आ गई कि अन्नदाता ने हल छोड़कर आंदोलन का रास्ता चुन लिया? डोंगाकोहरौद में दूसरे दिन भी जारी अनशन को कांग्रेस विधायक शेषराज हरबंश का समर्थन मिला। क्या अब सरकार जागेगी या आंदोलन और उग्र होगा?

जांजगीर-चांपा। आषाढ़ के महीने में जहां किसान खेती-किसानी में जुटे रहते हैं, वहीं पामगढ़ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम डोंगाकोहरौद के किसान और ग्रामीण पक्की सड़क की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे हैं। सोमवार को आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से सड़क निर्माण की मांग के बावजूद सरकार ने केवल आश्वासन दिए, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

आंदोलनकारियों ने साफ कहा कि जब तक सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं होगा, तब तक आमरण अनशन समाप्त नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि अब उन्हें वादे नहीं, बल्कि धरातल पर विकास कार्य चाहिए।

आंदोलन को कांग्रेस विधायक शेषराज हरबंश का लगातार समर्थन मिल रहा है। विधायक दूसरे दिन भी अनशन स्थल पहुंचीं, आंदोलनकारियों के बीच बैठकर उनका हौसला बढ़ाया और भरोसा दिलाया कि उनकी जायज मांग पूरी होने तक वे उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेंगी।

इस दौरान विधायक शेषराज हरबंश ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आषाढ़ जैसे महत्वपूर्ण कृषि सीजन में किसानों का खेत छोड़कर सड़क के लिए अनशन पर बैठना सरकार की संवेदनहीनता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह जनता के अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई है और सड़क निर्माण शुरू होने तक संघर्ष जारी रहेगा।

ग्रामीणों और युवाओं ने भी ऐलान किया कि “सड़क बनेगी, तभी अनशन समाप्त होगा।” इससे क्षेत्र में आंदोलन लगातार तेज होता नजर आ रहा है।

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